India is witnessing a sharp rise in electricity demand due to extreme heat and gas shortages. Amid supply disruptions caused by tensions in Gulf countries, the nation is increasingly relying on coal-based power plants, with many delaying scheduled maintenance to meet growing energy needs.
देश में भीषण गर्मी और गैस की कमी के चलते बिजली की मांग तेजी से बढ़ रही है, दूसरी ओर खाड़ी देशों में युद्ध के चलते गैस और कच्चे तेल की सप्लाई में अड़चनों को देखते हुए भारत की बिजली की जरुरत के लिए एक बार फिर कोयले पर ज्यादा निर्भर होती नजर आ रही है। इसी वजह से कई कोयला आधारित पावर प्लांट्स ने अपने शेड्यूल मेंटेंनेंस को तीन महीनों के लिए टाल दिया है।
ऊर्जा मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव पीयूष सिंह के मुताबिक, करीब 10 गीगावाट के कोयला आधारित थर्मल पावर प्लांट्स ने अपने निर्धारित मेंटेनेंस कार्य को फिलहाल टाल दिया है, ताकि बिजली उत्पादन में कोई कमी न आए और लगातार सप्लाई बनी रहे। गर्मी के मौसम में बढ़ती खपत को देखते हुए यह कदम जरूरी माना जा रहा है। इस बीच केंद्र सरकार ने भी स्थिति को संभालने के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं। सरकार ने कुछ कोयला आधारित बिजली संयंत्रों को फुल कैपेसिटी पर संचालन करने का आदेश दिया है, ताकि बिजली की कमी की आशंका को टाला जा सके।
ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि भारत की बिजली व्यवस्था में कोयले की भूमिका अभी भी बेहद अहम है। देश में आज भी करीब 75% बिजली उत्पादन कोयले से होता है, जिसके चलते किसी भी तरह की मांग बढ़ने पर सबसे पहले दबाव इसी सेक्टर पर आता है। साथ ही खाड़ी देशों में चल रहे युद्ध के कारण गैस सप्लाई में अड़चनें आ रही है। इसी वजह से गैस आधारित पावर प्लांट फिलहाल उत्पादन नहीं कर रहे हैं। इससे भी कोयला आधारित पावर प्लांट्स की परेशानियां बढ़ गई हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, गैस सप्लाई में कमी और अंतरराष्ट्रीय हालातों के कारण वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर दबाव बढ़ा है, जिससे कोयले की मांग में और तेजी आई है।
क्या है आगे की चुनौती?
बढ़ती मांग के बीच सप्लाई संतुलित रखना
प्लांट्स की लगातार संचालन क्षमता बनाए रखना
कोयले की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना
कुल मिलाकर, गर्मी और गैस संकट ने यह साफ कर दिया है कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा में कोयले की भूमिका फिलहाल सबसे मजबूत कड़ी बनी हुई है।
