Mobile EV charger shortage India
Mobile EV charger shortage India

EV revolution is at a crossroads. While the demand for electric vehicles is skyrocketing due to rising fuel costs and pollution, the charging infrastructure is struggling to keep pace. Explore the gap between India’s green dreams and the ground reality.

भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) का क्रेज आसमान छू रहा है। पेट्रोल-डीजल की महंगाई और प्रदूषण से परेशान होकर लोग तेजी से ई-वाहनों की ओर बढ़ रहे हैं। लेकिन इस ‘हरित क्रांति’ के सामने सबसे बड़ा ब्रेकर चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की भारी कमी है। देश में ईवी ट्रांजिशन मुश्किल दौर से गुजर रहा है, जहां एक ओर मांग तेजी से बढ़ रही है, तो दूसरी तरफ चार्जिंग का ढांचा कछुए की गति से चल रहा है।

तेज रफ्तार बिक्री, धीमी चार्जिंग
आंकड़े बताते हैं कि 2025-26 तक इलेक्ट्रिक वाहनों की कुल रजिस्ट्रेशन संख्या में 23 लाख से ज्य़ादा रहा है। जबकि देश में 60 लाख से ज्य़ादा ईवी सड़कों पर हैं। सड़कों पर इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर और कारें आसानी दे देखी जाने लगी हैं। लेकिन जब बात इन्हें चार्ज करने की आती है, तो इन वाहन मालिकों को गाड़ी को चार्ज करने में भारी परेशानी होती है, देश भर में ईवी की तुलना में चार्जिंग स्टेशन बहुत कम हैं। रिपोर्टों के अनुसार, कई इलाकों में चार्जिंग पॉइंट्स की कमी के कारण लोगों को अपने वाहन चार्ज करने के लिए कई किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। बहुत से लोगों ने अपने घर पर ही चार्जिंग स्टेशन लगा लिए हैं, क्योंकि पब्लिक इंफ्रा की भारी कमी है।

देश में कुल 26 हज़ार से ज्य़ादा चार्जर फिलहाल मौजूद हैं, लेकिन इसके बाद भी यह माजूदा गाड़ियों के स्टैंडर्ड के मुताबिक काफी कम है। देश में फिलहाल 225 गाड़ियों पर एक ईवी चार्जर है, जबकि चीन जैसे देश में हर 7 गाड़ियों पर एक ईवी चार्जर है। इसलिए वहां ईवी गाड़ियों की बिक्री बहुत ज्य़ादा है।

जानकारों के मुताबिक, पब्लिक इंफ्रा के तहत लगने वाले ईवी 8 किलोवाट के चार्जर की कीमत 8 लाख रुपये होती है, जबकि इसमें लगने वाले इंफ्रा की कीमत अलग होती है। पेट्रोल पंप और दूसरी जगहों पर ईवी चार्जर लग तो रहे हैं, लेकिन जितनी गाड़ियां बिक रही है, उसके मुकाबले यह कम हैं।

यह स्थिति ई-वाहनों के मालिकों के लिए ‘रेंज एंग्जायटी’ (बैटरी खत्म होने का डर) पैदा कर रही है।

कम चार्जिंग पॉइंट्स: सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन सीमित हैं, और जो हैं, उन पर अक्सर भीड़ रहती है।

सोसायटी में बाधा: कई हाउसिंग सोसायटियों में चार्जिंग पॉइंट लगाने को लेकर आरडब्ल्यूए (RWA) का विरोध या पार्किंग की समस्या होती है।

कामकाज पर असर: टैक्सी और ऑटो चालकों के लिए, जो दिन भर गाड़ी चलाते हैं, चार्जिंग के लिए घंटों इंतजार करना कमाई का बड़ा नुकसान है।

कड़ी मेहनत, संघर्ष भरी राह
यद्यपि टाटा पावर जैसी कंपनियां और सरकार चार्जिंग स्टेशन बढ़ा रही हैं और पेट्रोल पंपों पर भी चार्जिंग की सुविधा दी जा रही है, लेकिन गति मांग के मुकाबले बहुत धीमी है। मुंबई में कोलाबा, वर्ली, बांद्रा जैसे इलाकों में नए चार्जिंग पॉइंट्स लगाने की योजनाएं हैं, लेकिन वे अभी भी पूरी तरह से कार्यात्मक नहीं हैं।

भारत में ई-मोबिलिटी का भविष्य सुनहरा है, लेकिन तभी जब चार्जिंग का बुनियादी ढांचा सड़कों पर दौड़ती गाड़ियों की संख्या के साथ कदम मिलाकर चले। जब तक हर गली-मोहल्ले में आसानी से चार्जिंग की सुविधा उपलब्ध नहीं होगी, तब तक इलेक्ट्रिक वाहनों का वास्तविक फायदा आम भारतीय तक नहीं पहुंच पाएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *