India witnesses record-breaking electricity demand amid intense heatwave conditions, with daily power consumption crossing 270 GW. Despite rising pressure on the power system, electricity supply remains stable through efficient grid management and diversified energy sources.
देशभर में पड़ रही भीषण गर्मी का असर अब बिजली खपत पर भी साफ दिखाई देने लगा है। कई राज्यों में तापमान लगातार 45 डिग्री सेल्सियस के आसपास या उससे ऊपर बना हुआ है, जिसके कारण एयर कंडीशनर, कूलर, पंखों और अन्य बिजली उपकरणों के इस्तेमाल में भारी वृद्धि हुई है। इसका सीधा असर देश की बिजली मांग पर पड़ा है और वर्तमान में रोजाना बिजली की मांग 260 गीगावाट से अधिक पहुंच गई है, जिसे ऊर्जा क्षेत्र के लिए एक अभूतपूर्व स्थिति माना जा रहा है। 18 मई को बिजली की मांग 257 गिगावाट रही थी, जबकि 21 मई को यह 270 गिगावाट तक पहुंची है।
ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि देश में बढ़ती गर्मी के चलते बिजली खपत के नए रिकॉर्ड बन रहे हैं। विशेष रूप से उत्तर भारत, पश्चिम भारत और मध्य भारत के कई हिस्सों में गर्म हवाओं और लू की स्थिति ने बिजली की जरूरत को तेजी से बढ़ा दिया है। घरेलू उपयोग के साथ-साथ उद्योग, वाणिज्यिक प्रतिष्ठान और कृषि क्षेत्र में भी बिजली की खपत बढ़ी है।
हालांकि इतनी भारी मांग के बावजूद राहत की बात यह है कि देश की बिजली व्यवस्था फिलहाल दबाव को संभालने में सफल दिखाई दे रही है। बिजली उत्पादन कंपनियां और ग्रिड प्रबंधन एजेंसियां लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और बिजली आपूर्ति को सुचारु बनाए रखने के लिए विभिन्न स्रोतों से उत्पादन क्षमता का पूरा उपयोग किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि कोयला आधारित बिजली संयंत्रों के साथ-साथ जलविद्युत, गैस आधारित परियोजनाओं और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का बेहतर समन्वय इस समय बड़ी भूमिका निभा रहा है। इसके अलावा ग्रिड प्रबंधन प्रणाली को भी मजबूत किया गया है, जिससे अलग-अलग राज्यों में बिजली आपूर्ति संतुलित रखने में मदद मिल रही है।
ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में गर्मी और बढ़ती है तो बिजली मांग नए रिकॉर्ड भी बना सकती है। ऐसे में बिजली उत्पादन, कोयला उपलब्धता और ग्रिड स्थिरता को बनाए रखना सरकार और ऊर्जा कंपनियों के लिए बड़ी चुनौती रहेगा। फिलहाल, बढ़ती गर्मी और रिकॉर्ड बिजली मांग के बीच देश की बिजली व्यवस्था का स्थिर बने रहना उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर माना जा रहा है।
