भारत पेट्रोल कहां से खरीदता है?

Hardeep Singh Puri, Ministry of Petroleum and Natural Gas
Hardeep Singh Puri, Ministry of Petroleum and Natural Gas

India is diversifying its energy imports by sourcing crude oil from around 41 countries and LNG from 15 countries. Know where India imports LPG, crude oil and petroleum products from.

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए अब सिर्फ चुनिंदा खाड़ी देशों पर निर्भर नहीं है, बल्कि अब भारतीय कंपनियां दुनिया में बहुत सारे देशों से कच्चा तेल, गैस और अन्य पेट्रोलियम उत्पाद खरीद रहा है, इस कदम से अब खाड़ी जैसे युद्ध के समय भारत की ऊर्जा सुरक्षा बेहतर होगी। खासकर कच्चे तेल के मामले में भारत ने अपने आयात स्रोतों का तेजी से विस्तार किया है। सरकार के अनुसार भारत अब करीब 41 देशों से कच्चा तेल आयात कर रहा है, जबकि 2006-07 में यह संख्या करीब 27 थी। इसका उद्देश्य किसी एक देश या क्षेत्र पर अत्यधिक निर्भरता कम करना और वैश्विक संकट के समय ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखना है।

भारत 41 देशों से खरीद रहा है कच्चा तेल

भारत अपनी घरेलू तेल जरूरतों का करीब 85 प्रतिशत कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। पिछले कुछ वर्षों में रूस, इराक, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और अमेरिका भारत के प्रमुख कच्चा तेल आपूर्तिकर्ताओं में रहे हैं। हालांकि भारत की खरीद अब केवल इन देशों तक सीमित नहीं है। अमेरिका, ब्राजील, कनाडा, गुयाना, नाइजीरिया और अन्य देशों से भी भारतीय कंपनियां कच्चा तेल खरीद रही हैं।
वित्त वर्ष 2024-25 में रूस भारत के कच्चे तेल आयात का सबसे बड़ा स्रोत रहा। उपलब्ध व्यापार आंकड़ों के अनुसार उस वर्ष रूस की हिस्सेदारी मूल्य के आधार पर करीब 35 प्रतिशत रही।
सरकार के मुताबिक 2026 में भारत के कच्चे तेल आयात स्रोत बढ़कर 40 से अधिक देशों तक पहुंच गए हैं। यह विविधीकरण ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब पश्चिम एशिया में तनाव और समुद्री मार्गों में व्यवधान से ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने का जोखिम बढ़ा है।
LPG के लिए भी बदला भारत का सप्लाई नेटवर्क
रसोई गैस यानी एलपीजी के मामले में भारत लंबे समय तक पश्चिम एशिया के देशों पर काफी निर्भर रहा है। वित्त वर्ष 2025 में संयुक्त अरब अमीरात, कतर, सऊदी अरब और कुवैत भारत के प्रमुख एलपीजी आपूर्तिकर्ता रहे। क्रिसिल के अनुसार उस समय पश्चिम एशिया भारत के एलपीजी आयात का करीब 90-93 प्रतिशत हिस्सा उपलब्ध करा रहा था।
लेकिन 2026 में तस्वीर तेजी से बदली है। पश्चिम एशिया में संकट के बाद भारतीय तेल कंपनियों ने अमेरिका सहित कई नए स्रोतों से एलपीजी खरीद बढ़ाई। क्रिसिल के अनुसार अप्रैल 2026 में अमेरिका की हिस्सेदारी भारत के एलपीजी आयात में करीब एक-तिहाई तक पहुंच गई थी, जबकि फरवरी में यह लगभग 8 प्रतिशत थी। इसी दौरान ईरान से भी आयात दोबारा शुरू हुआ और अर्जेंटीना, चिली, फ्रांस तथा नीदरलैंड जैसे देशों से भी एलपीजी कार्गो आए।
जून 2026 में अमेरिका भारत का सबसे बड़ा एलपीजी आपूर्तिकर्ता बना रहा। केप्लर के आंकड़ों के अनुसार उस महीने अमेरिका से करीब 7.74 लाख टन एलपीजी आयात हुई, जबकि भारत का कुल एलपीजी आयात करीब 11.91 लाख टन रहा।
अगस्त 2026 में उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक अमेरिका की हिस्सेदारी और बढ़कर भारत के एलपीजी आयात का करीब 67 प्रतिशत हो गई है। इसका मतलब यह नहीं है कि भारत ने पश्चिम एशिया से खरीद पूरी तरह बंद कर दी है, बल्कि संकट के दौरान आयात का स्रोत तेजी से बदला है।

क्या भारत पेट्रोल भी विदेशों से खरीदता है?

यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। भारत पेट्रोल और डीजल के लिए मुख्य रूप से कच्चा तेल आयात करता है और उसे देश की रिफाइनरियों में पेट्रोल, डीजल, एटीएफ और अन्य उत्पादों में बदला जाता है।
इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि भारत अपनी पेट्रोल की जरूरत का बड़ा हिस्सा सीधे दूसरे देशों से खरीदता है। भारत के पास दुनिया की बड़ी रिफाइनिंग क्षमताओं में से एक है और देश पेट्रोलियम उत्पादों का बड़ा निर्यातक भी है। वाणिज्य मंत्रालय के व्यापार पोर्टल के अनुसार पेट्रोलियम उत्पाद भारत के प्रमुख निर्यात उत्पादों में शामिल हैं।
हालांकि बाजार की जरूरत, रिफाइनरी की तकनीकी आवश्यकताओं और कीमत के आधार पर भारत कुछ पेट्रोलियम उत्पादों का आयात भी करता है। इसलिए कच्चा तेल आयात और पेट्रोल आयात एक ही चीज नहीं हैं।

LNG भी कई देशों से आ रहा

भारत ने प्राकृतिक गैस के मामले में भी अपने आयात स्रोतों को बढ़ाया है। हालिया सरकारी जानकारी के अनुसार भारत अब 15 देशों से एलएनजी आयात कर रहा है, जबकि पहले यह संख्या करीब छह देशों की थी।
इससे स्पष्ट है कि भारत की ऊर्जा नीति अब केवल किसी एक क्षेत्र पर निर्भर रहने के बजाय कई देशों और अलग-अलग समुद्री मार्गों से आपूर्ति सुनिश्चित करने पर केंद्रित है।
अगर यह परियोजना निर्धारित योजना के अनुसार आगे बढ़ती है, तो आने वाले वर्षों में भारत न केवल अपनी सैन्य परिवहन जरूरतों को घरेलू उत्पादन से पूरा करने की स्थिति में आ सकता है, बल्कि बड़े सैन्य विमानों के निर्माण और उनकी वैश्विक आपूर्ति की दिशा में भी आगे बढ़ सकता है।

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