Over 50,000 households in PM Narendra Modi’s constituency, Varanasi (Kashi), have installed rooftop solar panels under the PM Surya Ghar scheme, leading to zero electricity bills for 17,698 families. Read the full news report along with key insights on India’s total solar power capacity.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी (काशी) में ‘पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना’ के तहत हरित ऊर्जा अपनाने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की गई है। जिले में 50,000 से अधिक परिवारों ने अपने घरों की छत पर सोलर पैनल स्थापित कर लिए हैं। इसका सीधा फायदा यह हुआ है कि करीब 17,698 उपभोक्ताओं का मासिक बिजली बिल घटकर पूरी तरह ‘ज़ीरो’ (शून्य) आने लगा है।
7.50 लाख यूनिट प्रतिदिन उत्पादन
वाराणसी के मुख्य विकास अधिकारी (CDO) और यूपीनेडा (UPNEDA) के अधिकारियों के अनुसार, जिले में अब तक 76,000 से अधिक लोगों ने इस योजना के लिए आवेदन किया है। वाराणसी में रूफटॉप सोलर के जरिए प्रतिदिन करीब 7.50 लाख यूनिट स्वच्छ बिजली का उत्पादन हो रहा है, जिसका मूल्य लगभग 51 लाख रुपये प्रतिदिन से अधिक है। इसके साथ ही, वाराणसी जिले में कुल सोलर क्षमता 150 मेगावाट (MW) के आंकड़े को पार कर गई है, जिससे यह जिला उत्तर प्रदेश में शीर्ष प्रदर्शन करने वाले क्षेत्रों में दूसरे स्थान पर बना हुआ है।
नेट मीटर्ड सिस्टम के जरिए उपभोक्ता अपनी जरूरत से ज्यादा पैदा होने वाली बिजली ग्रिड को भेज देते हैं, जिससे उनके पिछले बिलों का संतुलन शून्य हो जाता है। इससे न केवल आम नागरिकों को बजटीय राहत मिल रही है, बल्कि पारंपरिक बिजली पर निर्भरता भी कम हो रही है।
देश में सौर ऊर्जा का महाअभियान: भारत की कुल सोलर क्षमता
वाराणसी में जमीनी स्तर पर दिख रहा यह बदलाव भारत के राष्ट्रीय सौर ऊर्जा परिदृश्य की एक सशक्त झलक है। केंद्र सरकार की नीतियों और ‘पीएम सूर्यघर’ जैसी योजनाओं के चलते भारत विश्व स्तर पर सौर ऊर्जा के क्षेत्र में तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश बन चुका है।
- कुल स्थापित क्षमता: भारत की कुल स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता 162.15 गीगावाट (GW) के स्तर को पार कर गई है।
- 57 गुना वृद्धि: साल 2014 में देश की सौर क्षमता मात्र 2.82 गीगावाट थी, जिसमें पिछले 12 वर्षों में लगभग 57 गुना की रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
- रूफटॉप सोलर का योगदान: भारत की कुल 162.15 GW क्षमता में से लगभग 30.11 GW क्षमता अकेले रूफटॉप (छत पर लगे) सोलर प्रोजेक्ट्स से आ रही है, जबकि 125.60 GW यूटिलिटी-स्केल (बड़े सौर पार्क) और 6.43 GW ऑफ-ग्रिड सिस्टम से हासिल हो रहा है।
काशी की यह सफलता दिखाती है कि कैसे सौर ऊर्जा नीतियां सिर्फ कागजों तक सीमित न रहकर आम लोगों के घरों के बजट को संवारने और भारत को ऊर्जा आत्मनिर्भर बनाने में सीधी भूमिका निभा रही हैं।
