Leading Indian steelmakers have raised HRC and CRC list prices by ₹750–1,500 per tonne for August 2026 deliveries due to planned maintenance shutdowns, tighter domestic supply, and expectations of post-monsoon demand recovery.
देश की प्रमुख स्टील कंपनियों ने अगस्त 2026 की डिलीवरी के लिए फ्लैट स्टील (Flat Steel) की सूची कीमतों (List Prices) में 750 से 1,500 रुपये प्रति टन तक की बढ़ोतरी की है। यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से हॉट-रोल्ड कॉयल (HRC) और कोल्ड-रोल्ड कॉयल (CRC) पर लागू की गई है। कंपनियों का मानना है कि मेंटेनेंस शटडाउन के कारण आपूर्ति सीमित होने और मानसून के बाद मांग में सुधार की उम्मीद से बाजार का माहौल बेहतर हुआ है।
नई कीमतों के अनुसार HRC (2.5-8 मिमी, IS2062, Gr E250 Br) की सूची कीमत 57,000-58,500 रुपये प्रति टन (एक्स-मुंबई) हो गई है। वहीं CRC (0.9 मिमी, IS513 CR1) की कीमत बढ़कर 63,000-66,500 रुपये प्रति टन पहुंच गई है।
हालांकि, ट्रेड मार्केट में कीमतों में उतनी तेजी नहीं दिखी। मुंबई बाजार में HRC का कारोबार लगभग 57,700 रुपये प्रति टन और CRC करीब 64,900 रुपये प्रति टन पर हुआ। इससे संकेत मिलता है कि डिस्ट्रीब्यूटर और अंतिम उपभोक्ता अभी भी केवल जरूरत के हिसाब से खरीदारी कर रहे हैं।
मेंटेनेंस शटडाउन से घटी सप्लाई
उद्योग सूत्रों के अनुसार, कई बड़ी एकीकृत स्टील कंपनियां इस समय योजनाबद्ध मेंटेनेंस शटडाउन से गुजर रही हैं। इससे घरेलू बाजार में फ्लैट स्टील की उपलब्धता कम हुई है। उत्पादन में अस्थायी कमी की संभावना ने कंपनियों को कीमतें बढ़ाने का अवसर दिया।
स्टील उत्पादकों का मानना है कि सीमित सप्लाई के कारण आने वाले कुछ सप्ताह तक स्पॉट मार्केट में उपलब्धता कम रहेगी, जिससे उन्हें बेहतर कीमत मिलने की संभावना है।
मांग अभी भी कमजोर
हालांकि, मानसून के कारण निर्माण और विनिर्माण गतिविधियों में सामान्य मौसमी सुस्ती बनी हुई है। डिस्ट्रीब्यूटरों के पास पर्याप्त स्टॉक है और बाजार में नकदी की स्थिति भी बहुत मजबूत नहीं है। इसलिए खरीदारी फिलहाल आवश्यकता आधारित ही बनी हुई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि कीमतों में यह बढ़ोतरी तभी टिकाऊ साबित होगी, जब मानसून के बाद ऑटोमोबाइल, इंफ्रास्ट्रक्चर और इंजीनियरिंग जैसे प्रमुख क्षेत्रों से मांग में वास्तविक सुधार देखने को मिलेगा।
आयात अभी भी ऊंचे स्तर पर
घरेलू बाजार में सप्लाई संतुलित रहने के बावजूद स्टील आयात का स्तर ऊंचा बना हुआ है। 24 जुलाई तक भारत में 2.62 लाख टन HRC का आयात हो चुका था और 20 अगस्त तक करीब 1.37 लाख टन अतिरिक्त आयात आने की संभावना है।
दक्षिण कोरिया, चीन और इंडोनेशिया भारत को HRC सप्लाई करने वाले प्रमुख देश बने हुए हैं।
दक्षिण कोरिया से आने वाला अधिकांश स्टील दीर्घकालिक अनुबंधों के तहत कोरियाई कंपनियों के भारतीय संयंत्रों के लिए होता है, इसलिए इस पर अल्पकालिक बाजार उतार-चढ़ाव या सेफगार्ड ड्यूटी का सीमित असर पड़ता है।
वहीं, चीन से आने वाले HRC का बड़ा हिस्सा एडवांस ऑथराइजेशन स्कीम के तहत पाइप और ट्यूब निर्माता आयात करते हैं, जिसे प्रोसेसिंग के बाद पुनः निर्यात किया जाता है। इसलिए यह आयात मुख्य रूप से व्यापारिक बिक्री के बजाय निर्यात-उन्मुख उत्पादन से जुड़ा हुआ है।
आगे क्या?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल स्टील बाजार संतुलित स्थिति में है। एक ओर मेंटेनेंस शटडाउन से सप्लाई सीमित हो रही है, तो दूसरी ओर मानसून के कारण मांग कमजोर बनी हुई है। ऐसे में अगस्त के दौरान कीमतों की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि उत्पादन कब सामान्य होता है और मानसून के बाद घरेलू मांग कितनी तेजी से बढ़ती है।
