SAIL reported a strong Q1 FY27 performance driven by financial discipline, improved product mix, higher CAPEX, and a 269% surge in iron ore sales.
पश्चिम एशिया में युद्ध के बीच भी देश की प्रमुख स्टील कंपनी SAIL (स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड) ने बेहतर वित्तीय प्रबंधन से चालू साल की पहली तिमाही में बेहतर प्रदर्शन किया है। कंपनी ने न केवल पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में मुनाफे में उल्लेखनीय वृद्धि हासिल की, बल्कि वित्तीय अनुशासन, बेहतर नकदी प्रबंधन और परिचालन दक्षता के दम पर वैश्विक चुनौतियों के बीच भी अपनी मजबूती साबित की।
SAIL के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक डॉ. अशोक कुमार पांडा ने कहा कि पहली तिमाही का प्रदर्शन कंपनी की एकीकृत रणनीति की सफलता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में अस्थिरता के कारण उत्पन्न वैश्विक चुनौतियों के बावजूद कंपनी ने वित्तीय प्रबंधन और सक्रिय परिचालन रणनीतियों के माध्यम से शानदार प्रदर्शन किया। उनके अनुसार, दक्षता में सुधार, सख्त वित्तीय नियंत्रण, बेहतर कार्यशील पूंजी (वर्किंग कैपिटल) प्रबंधन और मजबूत कैश फ्लो ने इस सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
डॉ. पांडा ने बताया कि पहली तिमाही के दौरान कंपनी ने उधारी को नियंत्रित रखा और अपनी मजबूत वित्तीय विश्वसनीयता के आधार पर कर्ज की लागत को भी कम किया। इससे कंपनी की तरलता (Liquidity) मजबूत बनी रही। साथ ही, डेट-इक्विटी अनुपात और नेट डेट-EBITDA में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया, जो SAIL के घटते कर्ज और बरकरार लाभप्रदता को दर्शाता है।
कंपनी ने अपने उत्पाद पोर्टफोलियो में भी सुधार किया है। Q1 FY27 में कुल बिक्री योग्य स्टील में फिनिश्ड स्टील की हिस्सेदारी 86% से बढ़कर 89% हो गई, जिससे सेमी-फिनिश्ड उत्पादों पर निर्भरता कम हुई है। वहीं, वैल्यू-एडेड स्टील की डिस्पैच में 7.5% की वृद्धि दर्ज की गई, जो गुणवत्ता आधारित विकास पर कंपनी के फोकस को दर्शाती है।
निवेश के मोर्चे पर भी SAIL ने अपने लक्ष्य से बेहतर प्रदर्शन किया। पहली तिमाही में कंपनी का कैपेक्स (CAPEX) ₹2,306 करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले बढ़कर ₹2,575 करोड़ रहा। यह क्षमता विस्तार और संयंत्रों के आधुनिकीकरण के प्रति कंपनी की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
परिचालन स्तर पर भी कंपनी ने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल कीं। ब्लास्ट फर्नेस की उत्पादकता में सुधार हुआ, फेरो-अलॉय और फ्लक्स की खपत को अनुकूलित कर स्टील उत्पादन की लागत को नियंत्रित किया गया तथा आगामी तिमाहियों में स्थिर उत्पादन सुनिश्चित करने के लिए निर्धारित पूंजीगत मरम्मत कार्य समय से पहले पूरे किए गए।
डॉ. पांडा ने कहा कि आपूर्ति श्रृंखला में आई बाधाओं के बावजूद कंपनी ने परिचालन निरंतरता बनाए रखी। चूना पत्थर (Limestone) की आवश्यकता को घरेलू और बाहरी स्रोतों के संतुलित उपयोग से पूरा किया गया, जबकि प्रोपेन गैस की वैकल्पिक व्यवस्था कर उत्पादन प्रभावित नहीं होने दिया गया।
खनन क्षेत्र में भी SAIL का प्रदर्शन उल्लेखनीय रहा। कंपनी ने अपनी कैप्टिव खदानों की क्षमता का बेहतर उपयोग करते हुए लौह अयस्क (Iron Ore) का उत्पादन बढ़ाया, जिससे आंतरिक जरूरतें पूरी होने के साथ-साथ घरेलू बाजार में अतिरिक्त लौह अयस्क की बिक्री भी संभव हुई। इसके परिणामस्वरूप Q1 FY27 में लौह अयस्क की बिक्री पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 269% बढ़ गई, जिससे कंपनी के मुनाफे को बड़ा सहारा मिला।
कुल मिलाकर, SAIL का पहली तिमाही का प्रदर्शन यह दर्शाता है कि कंपनी वित्तीय मजबूती, बेहतर उत्पाद मिश्रण, परिचालन दक्षता और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप निवेश के जरिए वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भी अपनी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को लगातार मजबूत कर रही है।
