Gulf oil supply crisis: India may increase crude oil imports from Russia as supply risks emerge from Gulf countries amid rising Middle East tensions. Government reviews contingency plans to ensure energy security.
Gulf oil supply crisis: अमेरिका-इस्राइल के ईरान पर हमले के बाद पूरी दुनिया में कच्चे तेल को लेकर चिंताएं बढ़ गई है, भारत भी इससे अछूता नहीं है। भारत के करीब 35 शिप गल्फ में फंस गए हैं और फिलहाल इस क्षेत्र से भारत की कच्चे तेल की सप्लाई पूरी तरह से रूक गई है। ऐसे में भारतीय रिफाइनरियां एक बार फिर रूस से तेल मंगा रही हैं। ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, ऐसी स्थिति में रूस से कच्चे तेल का आयात बढ़ाया जा सकता है, ताकि देश की ऊर्जा जरूरतों को बिना किसी बाधा के पूरा किया जा सके। हाल ही में रूस से कच्चे तेल की आपूर्ति बढ़ाई गई है।
भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत से अधिक हिस्सा आयात करता है। इसमें बड़ा हिस्सा इराक, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और कुवैत जैसे गल्फ देशों से आता है। इन देशों से आने वाला तेल मुख्य रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते भारत पहुंचता है, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है।
हाल के दिनों में मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और संभावित सैन्य टकराव के कारण इस समुद्री मार्ग की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। यदि इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही बाधित होती है तो वैश्विक तेल बाजार पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है। इसी जोखिम को देखते हुए भारत सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों पर रणनीति बना रही हैं।
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि रूस इस समय भारत के लिए सबसे बड़ा वैकल्पिक आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा है। रूस पहले से ही भारत को रियायती दरों पर कच्चा तेल उपलब्ध कराता रहा है और पिछले दो वर्षों में रूस भारत का प्रमुख तेल सप्लायर बन चुका है। यदि गल्फ क्षेत्र में स्थिति बिगड़ती है तो भारतीय रिफाइनरियां रूस से तेल खरीद बढ़ा सकती हैं।
रिपोर्टों के अनुसार हाल ही में करीब 95 लाख बैरल रूसी कच्चा तेल भारत की ओर भेजा गया है, जो संभावित आपूर्ति संकट के बीच भारत के लिए राहत साबित हो सकता है। इससे भारतीय रिफाइनरियों को कच्चे तेल की उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिलेगी।
सरकार का कहना है कि फिलहाल देश में तेल की उपलब्धता को लेकर कोई तात्कालिक संकट नहीं है। भारत के पास रणनीतिक और वाणिज्यिक भंडार मिलाकर लगभग 50 दिनों तक की तेल जरूरत पूरी करने का स्टॉक मौजूद है। इसके अलावा भारत ने कई देशों के साथ ऊर्जा सहयोग समझौते भी किए हैं ताकि आपूर्ति में विविधता बनी रहे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव लंबा खिंचता है तो भारत रूस के अलावा अमेरिका, अफ्रीकी देशों और लैटिन अमेरिका से भी कच्चे तेल का आयात बढ़ा सकता है। इससे न केवल ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी बल्कि घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर संभावित दबाव को भी नियंत्रित किया जा सकेगा।
ऊर्जा बाजार के जानकारों के अनुसार भारत की रणनीति स्पष्ट है—किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम करना और आपूर्ति के कई स्रोत विकसित करना। ऐसे में यदि गल्फ क्षेत्र में संकट गहराता है तो रूस भारत के लिए सबसे अहम ऊर्जा साझेदार साबित हो सकता है।
