International crude oil prices have declined, bringing the Indian Crude Basket down to $97 per barrel. Find out how lower oil prices could impact inflation, India’s import bill, the rupee, and the stock market.
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। भारतीय क्रूड बास्केट (Indian Crude Basket) घटकर 97 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई है। मार्च के बाद यह पहला अवसर है जब भारतीय बास्केट 100 डॉलर प्रति बैरल के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे पहुंची है। इससे भारत की अर्थव्यवस्था, महंगाई और ऊर्जा क्षेत्र को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।
अमेरिका-ईरान समझौते की उम्मीद से नरम पड़े तेल के दाम
विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते तथा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल आपूर्ति सामान्य होने की उम्मीदों ने वैश्विक बाजार में सकारात्मक माहौल बनाया है। इसके चलते ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) भी 100 डॉलर प्रति बैरल के नीचे फिसल गया। निवेशकों को उम्मीद है कि वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति बढ़ने से कीमतों पर दबाव बना रहेगा।
भारत के आयात बिल और महंगाई पर पड़ेगा असर
भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का 85 प्रतिशत से अधिक हिस्सा आयात करता है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से देश का आयात बिल कम हो सकता है। साथ ही चालू खाते के घाटे (Current Account Deficit – CAD) पर दबाव घटेगा और महंगाई को नियंत्रित रखने में मदद मिलेगी।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे बनी रहती हैं तो इसका सकारात्मक प्रभाव पेट्रोल, डीजल, उर्वरक और परिवहन लागत पर भी पड़ सकता है।
रुपये और शेयर बाजार को मिला समर्थन
कच्चे तेल की कीमतों में नरमी का असर भारतीय रुपये पर भी दिखाई दे रहा है। हाल के दिनों में तेल की कीमतों में गिरावट के बाद रुपये पर दबाव कम हुआ है और विदेशी निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है।
वहीं शेयर बाजार में भी इसका सकारात्मक असर देखने को मिला। तेल विपणन कंपनियों (OMCs), विमानन कंपनियों और टायर उद्योग से जुड़े शेयरों में खरीदारी बढ़ी है। कम कच्चे तेल की कीमतों से इन क्षेत्रों की परिचालन लागत घटती है, जिससे उनकी लाभप्रदता बढ़ने की संभावना रहती है।
भू-राजनीतिक जोखिम अभी भी बरकरार
हालांकि विश्लेषकों का कहना है कि पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थिति अभी पूरी तरह स्थिर नहीं हुई है। क्षेत्र में किसी भी प्रकार का तनाव या आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में तेल की कीमतों में फिर से तेजी देखने को मिल सकती है।
फिलहाल भारतीय क्रूड बास्केट का 97 डॉलर प्रति बैरल पर आना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए राहत भरा संकेत माना जा रहा है। इससे महंगाई नियंत्रण, आयात बिल में कमी और आर्थिक विकास को समर्थन मिलने की उम्मीद है।
