India successfully met its highest-ever peak electricity demand of over 271 GW while continuing power exports to neighbouring countries. Solar, thermal, hydro, and nuclear energy played a key role in ensuring reliable power supply.
भारत ने बिजली क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित करते हुए 25 जुलाई की दोपहर देश के इतिहास की अब तक की सबसे अधिक 271 गीगावाट से ज्यादा की पीक बिजली मांग (Peak Power Demand) को सफलतापूर्वक पूरा किया। इस दौरान भारत ने पड़ोसी देशों को बिजली निर्यात भी जारी रखा, जिससे देश की बिजली व्यवस्था की मजबूती और ग्रिड प्रबंधन की क्षमता का प्रदर्शन हुआ।
बिजली मंत्रालय के अनुसार, यह उपलब्धि मई 2024 में दर्ज 250 गीगावाट की अब तक की सर्वाधिक पीक बिजली मांग के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ती है। लगातार बढ़ती ऊर्जा जरूरतों के बीच इतनी बड़ी मांग को बिना किसी बड़े व्यवधान के पूरा करना देश के बिजली क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
केंद्रीय बिजली मंत्री मनोहर लाल ने सोमवार को बताया कि भारत ने मई 2026 में 271 गीगावाट की अब तक की सर्वाधिक पीक बिजली मांग को सफलतापूर्वक पूरा किया। उन्होंने कहा कि अगले वर्ष बिजली की मांग में करीब 30 गीगावाट और बढ़ने का अनुमान है। इसे देखते हुए सरकार ने 300 गीगावाट तक की पीक बिजली मांग को पूरा करने की तैयारी शुरू कर दी है।
मंत्रालय ने बताया कि रिकॉर्ड बिजली मांग को पूरा करने में थर्मल, जलविद्युत (हाइड्रो), परमाणु और नवीकरणीय ऊर्जा सहित सभी प्रमुख ऊर्जा स्रोतों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। इन सभी स्रोतों के संतुलित उपयोग से बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता और राष्ट्रीय ग्रिड की स्थिरता बनाए रखी गई।
विशेष रूप से सौर ऊर्जा (सोलर पावर) ने इस दौरान बड़ी भूमिका निभाई। पीक मांग के समय सौर ऊर्जा के साथ-साथ जलविद्युत और अन्य लचीले ऊर्जा स्रोतों ने बिजली आपूर्ति को संतुलित रखने में अहम योगदान दिया।
बिजली मंत्रालय ने कहा कि ऊर्जा स्रोतों के विविधीकरण, ग्रिड के बेहतर प्रबंधन और नवीकरणीय ऊर्जा की बढ़ती हिस्सेदारी के कारण देश लगातार बढ़ती बिजली मांग को सफलतापूर्वक पूरा करने में सक्षम हो रहा है। यह उपलब्धि भारत के ऊर्जा क्षेत्र की क्षमता और भविष्य की बढ़ती मांग को संभालने की तैयारियों को भी दर्शाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार मानसून के देर से पहुंचने और कई राज्यों में सामान्य से कम बारिश होने के कारण भी बिजली की मांग में तेज़ उछाल देखने को मिला। लंबे समय तक पड़ रही गर्मी और उमस के चलते एयर कंडीशनर, कूलर और सिंचाई के लिए बिजली की खपत बढ़ी, जिससे देश में बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। इसके बावजूद देश के बिजली तंत्र ने मांग को सफलतापूर्वक पूरा किया और पड़ोसी देशों को बिजली निर्यात भी जारी रखा।
