India takes a major step toward energy self-sufficiency as a tripartite agreement unlocks over 1,000 sq km in the Nagaland-Assam border region for oil, gas and mineral exploration, boosting national energy security and Northeast development.
नई दिल्ली। भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए पूर्वोत्तर भारत के नागालैंड और असम की सीमा से लगे क्षेत्रों में ऊर्जा एवं खनिज संसाधनों की खोज और उत्पादन के लिए एक महत्वपूर्ण त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस समझौते को देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और पूर्वोत्तर भारत के आर्थिक विकास को नई गति देने वाला कदम माना जा रहा है।
केंद्रीय मंत्री ने इस अवसर पर कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah की उपस्थिति में यह ऐतिहासिक समझौता संपन्न हुआ। कार्यक्रम में नागालैंड के मुख्यमंत्री Neiphiu Rio तथा केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री Hardeep Singh Puri भी मौजूद रहे।
नई दिल्ली। भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और पूर्वोत्तर क्षेत्र में आर्थिक विकास को नई गति देने के उद्देश्य से नागालैंड और असम के बीच ऊर्जा एवं खनिज संसाधनों के अन्वेषण और उत्पादन के लिए एक महत्वपूर्ण त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इसे भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक ऐतिहासिक और दूरगामी कदम बताया है।
समझौते पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफियू रियो और असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा भी मौजूद रहे।
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि असम भारत के कुल कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) भंडार का लगभग 22 प्रतिशत और देश के प्राकृतिक गैस भंडार का करीब 15 प्रतिशत हिस्सा रखता है। वहीं नागालैंड के पास असम-अराकान बेसिन के नागा-शुप्पेन बेल्ट में विशाल हाइड्रोकार्बन क्षमता मौजूद है। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में ऐसे संसाधन भी हैं जहां हाइड्रोकार्बन प्राकृतिक रूप से प्रवाहित होते हैं, जबकि कई क्षेत्रों में अभी भी विशाल संभावनाएं अप्रयुक्त पड़ी हुई हैं।
पुरी ने कहा, “पूर्वोत्तर भारत में अन्वेषण एवं उत्पादन (E&P) गतिविधियों की संभावनाएं बेहद उज्ज्वल हैं। यह समझौता निवेशकों को स्पष्टता और भरोसा प्रदान करेगा तथा ऊर्जा क्षेत्र में दीर्घकालिक निवेश का मार्ग प्रशस्त करेगा।”
उन्होंने बताया कि यह समझौता संबंधित सरकारों के बीच सहयोग का एक मजबूत ढांचा तैयार करता है, जिससे निवेशकों को नीति संबंधी निश्चितता मिलेगी, परिचालन गतिविधियों में निरंतरता बनी रहेगी और विभिन्न नियामकीय प्रक्रियाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा। इससे बड़े निवेशकों के लिए दीर्घकालिक निवेश निर्णय लेना आसान होगा।
हरदीप सिंह पुरी ने नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफियू रियो और असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का विशेष रूप से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि दोनों नेताओं ने मतभेदों से ऊपर उठकर क्षेत्र और देश के व्यापक हित में आगे बढ़ने का रास्ता तैयार किया है।
केंद्रीय मंत्री के अनुसार, इस समझौते के बाद खनिज तेल और गैस संबंधी गतिविधियों को नई गति मिलेगी, जिससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से बड़े पैमाने पर रोजगार का सृजन होगा। इसके साथ ही स्थानीय उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा, सड़क एवं अन्य बुनियादी ढांचे का विकास होगा तथा ठेकेदारों, सेवा प्रदाताओं और छोटे व्यवसायों के लिए नए अवसर पैदा होंगे।
उन्होंने कहा कि इस पहल से आसपास के समुदायों और पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र के आर्थिक विकास को महत्वपूर्ण बल मिलेगा। सरकार का मानना है कि पूर्वोत्तर भारत आने वाले वर्षों में देश के ऊर्जा मानचित्र पर एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभरेगा और भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को हासिल करने में निर्णायक भूमिका निभाएगा।
करीब 1,000 वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र को ऊर्जा एवं खनिज अन्वेषण के लिए खोलने वाला यह समझौता न केवल भारत की ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करेगा, बल्कि ‘विकसित भारत’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प को भी नई मजबूती प्रदान करेगा।मिलेगी और पूर्वोत्तर भारत राष्ट्रीय विकास की मुख्यधारा में और अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकेगा।
