The 500 MW Prototype Fast Breeder Reactor (PFBR) at Kalpakkam has attained criticality. India just achieved something monumental in global nuclear energy.
The 500 MW Prototype Fast Breeder Reactor (PFBR) at Kalpakkam has attained criticality. India just achieved something monumental in global nuclear energy.

India achieves major progress in fast breeder reactor technology, bringing Homi Bhabha’s vision closer to reality and strengthening long-term energy security.

भारत ने न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी के मामले में एक बड़ी सफलता हासिल की है। भारत दुनिया का दूसरा ऐसा देश बन गया है, जिसने फास्ट ब्रीडर न्यूक्लियर रिएक्टर की दिशा में बड़ी उपलब्धि हासिल कर दी है। भारत ने कलपक्कम का Prototype Fast Breeder Reactor (PFBR) क्रिटिकलिटी हासिल कर चुका है। यह 500 मेगावाट का स्वदेशी रिएक्टर भारत के तीन-चरणीय न्यूक्लियर प्रोग्राम के दूसरे चरण की शुरुआत है, जिसकी सबसे बड़ी खासियत है कि यह जितना ईंधन उपयोग करता है, उससे अधिक नया ईंधन (plutonium) तैयार करता है। इसका सीधा फायदा यह होगा कि भारत की Energy security मजबूत होगी, आयातित ईंधन पर निर्भरता घटेगी और लंबे समय तक स्थिर, सस्ती और स्वच्छ बिजली उत्पादन संभव होगा।
ऐसे समय में जब दुनिया में सबसे ज्य़ादा मांग एनर्जी की है तो यह रिएक्टर भारत को उसके विशाल थोरियम भंडार के उपयोग की दिशा में आगे बढ़ाता है, जो भविष्य में भारत को ऊर्जा के मामले में भारत को आत्मनिर्भर बना सकता है। यानी PFBR सिर्फ एक रिएक्टर नहीं, बल्कि आने वाले दशकों के लिए ऊर्जा आत्मनिर्भर भारत की नींव भी है। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसकी घोषणा करते हुए कहा कि अगर सब कुछ ठीक रहा तो इस तकनीक से भारत को अरब देशों या रूस से तेल पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।


भारत ने कल्पक्कम में सोमवार को फास्ट ब्रीडर न्यूक्लियर रिएक्टर की टेक्नोलॉजी को हासिल करने की आधिकारिक घोषणा कर दी। फास्ट ब्रीडर न्यूक्लियर रिएक्टर एक बेहद जटिल टेक्नोलॉजी होती है, जिसमें जितना ईंधन उपयोग होता है, उससे ज्य़ादा ईंधन बन भी जाता है। अभी तक कोई भी पश्चिमी देश इस तकनीक को हासिल करने में नाकाम रहे हैं, सिर्फ रूस ही दुनिया का इकलौता देश है, जोकि इस तकनीक से बिजली बनता है। इस तकनीक में न्यूक्लियर रिएक्टर में यूरेनियम की जगह थोरियम का इस्तेमाल किया जाता है। भारत में यूरेनियम तो नहीं है, लेकिन दुनिया के थोरियम भंडार का 25 फीसदी हिस्सा हमारे यहां है। यानी इस तकनीक की बदौलत परमाणु बिजली के क्षेत्र में भारत की यूरेनियम पर निर्भरता खत्म हो जाएगी। अभी तक भारत रूस और ऑस्ट्रेलिया से यूरेनियम आयात करता है।
दरअसल भारत ने फास्ट ब्रीडर न्यूक्लियर रिएक्टर की योजना 70 साल पहले बनाई थी, जब जानेमाने वैज्ञानिक होमी जहांगीर भाभा ने इस दिशा में काम शुरू किया था। तबसे भारत इस तकनीक को हासिल करने में लगा हुआ है। दुनिया के सबसे अमीर छह देशों ने फास्ट ब्रीडर न्यूक्लियर रिएक्टर्स तकनीक हासिल करने पर 50 बिलियन डॉलर (लगभग 4.25 लाख करोड़ रुपये) खर्च कर चुके हैं। लेकिन किसी को भी इसमें सफलता नहीं मिली। इस तकनीक को विकसित करने के लिए अमेरिका ने 15 बिलियन, जापान ने 12 बिलियन, ब्रिटेन ने 8 बिलियन, जर्मनी ने 6 बिलियन डॉलर खर्च किए, लेकिन सबने इस तरफ कोशिश बंद कर दी।
ब्रीडर रिएक्टर एक विशेष प्रकार का परमाणु रिएक्टर होता है जो जितना ईंधन खर्च करता है, उससे अधिक ईंधन (फ्यूल) पैदा करता है। इसमें मुख्य रूप से यूरेनियम-238 और प्लूटोनियम का उपयोग किया जाता है। जब रिएक्टर चलता है, तो यह नए फिसाइल मटेरियल (जैसे प्लूटोनियम-239) का उत्पादन करता है, यही “ब्रीडिंग” प्रक्रिया है।

भारत में ब्रीडर रिएक्टर का विकास
भारत इस क्षेत्र में दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल है। Indira Gandhi Centre for Atomic Research (IGCAR), कलपक्कम में इस तकनीक पर लंबे समय से रिसर्च कर रहा है।

प्रमुख परियोजना:
Prototype Fast Breeder Reactor (PFBR)
स्थान: Kalpakkam
क्षमता: 500 मेगावाट
निर्माण: Bharatiya Nabhikiya Vidyut Nigam Limited (BHAVINI)
PFBR भारत का पहला व्यावसायिक स्तर का फास्ट ब्रीडर रिएक्टर है, जिसे देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए “गेम-चेंजर” माना जा रहा है।

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