India oil import
India oil import

Explore India’s crude oil imports from Russia in 2026 – January low at 19.3% share (1.1 mb/d), February ~1.04 mb/d, March surge with US 30-day waiver amid Iran conflict. Latest data, analysis & energy security insights on EnergyNews.org.in.

Russia crude oil India 2026: रूस से कच्चा तेल खरीदने को लेकर अमेरिकी दबाव के बाद भी भारत लगातार रूस से तेल खरीदता रहा है, हालांकि पिछले कुछ महीनों में इसमें कुछ कमी आई थी, लेकिन भारत ने साफ किया है कि भारत अपने देश के हितों के हिसाब से फैसले लेगा। सरकार का कहना है कि देश की ऊर्जा सुरक्षा और आम उपभोक्ताओं को स्थिर कीमत पर पेट्रोलियम उत्पाद उपलब्ध कराना उसकी पहली जिम्मेदारी है, इसलिए कच्चे तेल की खरीद के फैसले पूरी तरह से आर्थिक और रणनीतिक हितों को ध्यान में रखकर लिए जाएंगे। भारत फिलहाल अपनी मांग का लगभग 20 प्रतिशत के आसपास रूस से खरीद रहा है, जोकि मार्च महीने में 35 परसेंट तक बढ़ सकता है।

भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में से एक है और अपनी जरूरत का करीब 85 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले किसी भी बदलाव का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था और ईंधन की कीमतों पर पड़ता है। यही वजह है कि भारत लगातार ऐसे देशों से तेल खरीदने की रणनीति अपनाता है जहां से उसे बेहतर कीमत और स्थिर आपूर्ति मिल सके। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनालड ट्रंप भारत की इस खरीद को लेकर लगातार निशाना साधते रहे हैं। साथ ही उन्हें भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ भी लगाया था।

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, भारत की ऊर्जा नीति का मुख्य उद्देश्य सस्ती और सुरक्षित ऊर्जा उपलब्ध कराना है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने अपने तेल आयात के स्रोतों में भी विविधता लाई है। मध्य-पूर्व के पारंपरिक आपूर्तिकर्ताओं के अलावा रूस, अमेरिका और अफ्रीकी देशों से भी कच्चा तेल खरीदा जा रहा है। इससे भारत को बेहतर कीमत पर तेल मिलने के साथ-साथ किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता भी कम हुई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर जारी संघर्ष और सप्लाई चेन में बाधाओं के कारण तेल बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे माहौल में भारत का यह रुख व्यावहारिक माना जा रहा है। ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों के मुताबिक, जब तक अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का उल्लंघन नहीं होता और भुगतान व्यवस्था संभव है, तब तक भारत सस्ते स्रोतों से तेल खरीदने की नीति जारी रख सकता है।

सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि भारत किसी भी भू-राजनीतिक दबाव के बजाय अपने आर्थिक हितों को प्राथमिकता देता है। उन्होंने कहा कि देश की विशाल आबादी और बढ़ती अर्थव्यवस्था को देखते हुए ऊर्जा की मांग लगातार बढ़ रही है, इसलिए स्थिर और किफायती आपूर्ति सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है।

रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद वैश्विक तेल बाजार में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। पश्चिमी देशों द्वारा रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों के बाद रूस ने एशियाई देशों, खासकर भारत और चीन को रियायती दरों पर कच्चा तेल बेचना शुरू किया। भारत ने इस अवसर का लाभ उठाते हुए रूस से तेल आयात में उल्लेखनीय वृद्धि की, जिससे देश को अरबों डॉलर की बचत हुई।

ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में भी भारत अपने तेल आयात के स्रोतों को संतुलित रखने की रणनीति जारी रखेगा। इससे न केवल ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी बल्कि घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतों को भी नियंत्रित रखने में मदद मिलेगी।

हाल ही में अमेरिका ने रूसी तेल खरीद पर भारत को 30-दिन का टेम्पररी वेवर दिया है, जिससे स्ट्रैंडेड रूसी क्रूड (समुद्र में फंसे 20-27 मिलियन बैरल) भारत को बेचा जा सके। भारतीय रिफाइनर्स ने 10 मिलियन+ बैरल से ज्यादा प्रॉम्प्ट रूसी क्रूड खरीदा है (मिडिल ईस्ट सप्लाई डिस्टर्बेंस के कारण)। साथ ही बेसलाइन फ्लो ~1 mb/d बना हुआ है, लेकिन अब बढ़ सकता है (संभावित 1.8-2 mb/d तक शॉर्ट टर्म में)।भारत के पास पर्याप्त स्टॉक (~250 मिलियन बैरल+ क्रूड और प्रोडक्ट्स) हैं, जो शॉर्ट-टर्म डिसरप्शन हैंडल कर सकते हैं।

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