US grants temporary license allowing India to buy 15 million barrels of Russian oil to stabilize global supply amid Middle East tensions.
India Russian oil import: अमेरिका इस्राइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के कारण कच्चे तेल की सप्लाई पर हो रहे असर को देखते हुए भारत रूस से करीब 15 मिलियन बैरल कच्चा तेल खरीदने जा रहा है, इसके लिए अमेरिका ने अस्थायी (टेंपरेरी) लाइसेंस दे दिया है। हालांकि यह छूट सीमित समय के लिए दी गई है, अमेरिका के इस कदम से तेल आपूर्ति को स्थिर बनाने और बाजार में कीमतों में अचानक उछाल को रोकना है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी प्रशासन ने भारतीय रिफाइनरियों को लगभग 30 दिनों के लिए यह विशेष अनुमति दी है। इस दौरान भारत उन रूसी तेल कार्गो को खरीद सकता है, जोकि समुद्र में मौजूद हैं या एशियाई बाजारों की ओर भेजे जा चुके हैं।
बाज़ार में आपूर्ति बनाए रखने की कोशिश
मध्य-पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति से जुड़े जोखिमों के बीच यह फैसला लिया गया है। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रूसी तेल की सप्लाई अचानक रुकती है तो वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में तेज उछाल आ सकता है। अमेरिका का कहना है कि इस अस्थायी लाइसेंस का उद्देश्य रूस को आर्थिक लाभ पहुंचाना नहीं बल्कि वैश्विक तेल बाजार में स्थिरता बनाए रखना है। इसी कारण यह छूट सीमित मात्रा और सीमित समय के लिए दी गई है।
भारत के पास पहुंचने वाले टैंकर
शिपिंग और ट्रैकिंग डेटा के अनुसार करीब 15 मिलियन बैरल रूसी कच्चा तेल पहले से ही समुद्र में टैंकरों में मौजूद है और इनमें से कई जहाज भारत या एशिया के नजदीकी समुद्री मार्गों पर हैं। इन टैंकरों के भारतीय बंदरगाहों तक पहुंचने में ज्यादा समय नहीं लगेगा। ऐसे में भारतीय रिफाइनरियां इस अस्थायी छूट का फायदा उठाकर तुरंत कच्चा तेल खरीद सकती हैं।
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है और अपनी जरूरतों का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में सस्ती कीमत पर मिलने वाला रूसी तेल भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद भारत ने रियायती दरों पर रूसी कच्चे तेल का आयात काफी बढ़ा दिया था। उस समय रूस भारत के लिए प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ता देशों में शामिल हो गया था। दूसरी ओर अमेरिका लगातार भारत को रूस से तेल खरीदने को लेकर सवाल खड़े करता रहा है। हालांकि पश्चिमी प्रतिबंधों और भुगतान व्यवस्था से जुड़ी चुनौतियों के कारण पिछले कुछ समय में खरीदारी में उतार-चढ़ाव देखने को मिला था।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की इस अस्थायी अनुमति से अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार को तत्काल राहत मिल सकती है।
वैश्विक तेल आपूर्ति में स्थिरता
अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव कम
एशियाई बाजार में सप्लाई बेहतर
भारतीय रिफाइनरियों को सस्ता कच्चा तेल
अगर मध्य-पूर्व में तनाव बढ़ता है या तेल आपूर्ति बाधित होती है तो इस तरह की अस्थायी छूट भविष्य में भी दी जा सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार यह छूट फिलहाल सीमित अवधि के लिए दी गई है और इसके बाद अमेरिका की नीति वैश्विक परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।
यदि ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बनी रहती है तो अमेरिका और अन्य पश्चिमी देश तेल आपूर्ति बनाए रखने के लिए नए विकल्प तलाश सकते हैं।
अमेरिका द्वारा भारत को दिया गया यह अस्थायी लाइसेंस वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे भारत को रूसी कच्चा तेल खरीदने का अवसर मिलेगा और साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की उपलब्धता बनाए रखने में भी मदद मिलेगी। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में भू-राजनीतिक परिस्थितियां ही तय करेंगी कि भारत और रूस के बीच तेल व्यापार किस दिशा में आगे बढ़ेगा।
