ONGC plans to sign agreements to operate two oil blocks in Venezuela under the country’s new petroleum law. The move is expected to strengthen India’s overseas energy investments and long-term energy security.
भारत की सबसे बड़ी तेल एवं गैस अन्वेषण कंपनी ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन (ONGC) जल्द ही वेनेजुएला में दो महत्वपूर्ण तेल परियोजनाओं के संचालन के लिए नए समझौतों पर हस्ताक्षर कर सकती है। कंपनी का यह कदम भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ONGC के वित्त निदेशक अनुपम अग्रवाल ने बुधवार को कहा कि वेनेजुएला के नए पेट्रोलियम कानून के तहत कंपनी को वहां की परियोजनाओं में काम करने की पूरी स्वतंत्रता मिल रही है। उन्होंने कहा कि पहले अमेरिकी प्रतिबंधों (Sanctions) के कारण कंपनी अपने परिचालन को सीमित रख रही थी, लेकिन अब परिस्थितियां बदल रही हैं।
उन्होंने कहा, “अब हमें वेनेजुएला की परियोजनाओं पर पूरी स्वतंत्रता के साथ काम करने का अवसर मिला है। पहले प्रतिबंधों से जुड़े जोखिमों के कारण हम अपने संचालन को सीमित रख रहे थे।”
इन परियोजनाओं में पहले से है ONGC की हिस्सेदारी
ONGC अपनी विदेशी निवेश शाखा ONGC Videsh के माध्यम से वेनेजुएला के San Cristobal Oil Field में 40 प्रतिशत हिस्सेदारी रखती है। इसके अलावा, भारतीय कंपनियों के एक समूह के साथ मिलकर Carabobo-1 Project में कंपनी की 18 प्रतिशत हिस्सेदारी भी है।
अब नए कानून के लागू होने के बाद इन दोनों परियोजनाओं में उत्पादन और निवेश बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए क्यों अहम है यह कदम?
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत आयात करता है। ऐसे में विदेशों में तेल एवं गैस संपत्तियों में निवेश भारत की ऊर्जा रणनीति का अहम हिस्सा है। वेनेजुएला दुनिया के सबसे बड़े सिद्ध तेल भंडार (Proven Oil Reserves) वाले देशों में शामिल है। यदि ONGC वहां अपनी गतिविधियां बढ़ाती है तो भविष्य में भारत के लिए कच्चे तेल की आपूर्ति के नए स्रोत मजबूत हो सकते हैं।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच भारत विभिन्न देशों में ऊर्जा परिसंपत्तियों में निवेश बढ़ाकर अपनी ऊर्जा सुरक्षा को और मजबूत करना चाहता है। वेनेजुएला में ONGC की सक्रियता इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।
