GAIL and RCF have signed an MoU to establish a 1.27 MMTPA gas-based urea plant in Maharashtra’s Vidarbha region, boosting fertilizer production and India’s self-reliance.
देश की अग्रणी गैस कंपनी गेल (इंडिया) लिमिटेड और राष्ट्रीय केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (RCF) ने महाराष्ट्र में गैस आधारित उर्वरक संयंत्र स्थापित करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह परियोजना दोनों कंपनियों द्वारा एक स्पेशल पर्पज व्हीकल (SPV) के माध्यम से विकसित की जाएगी।
प्रस्तावित यूरिया संयंत्र की वार्षिक उत्पादन क्षमता 1.27 मिलियन मीट्रिक टन (MMTPA) होगी। इस संयंत्र को महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में गेल की मुंबई-नागपुर-झारसुगुड़ा प्राकृतिक गैस पाइपलाइन (MNJPL) के किनारे स्थापित करने की योजना है।
परियोजना के कार्यान्वयन के लिए गेल और आरसीएफ रणनीतिक साझेदारी के तहत अवधारणा से लेकर निर्माण और संचालन तक संयुक्त रूप से काम करेंगे।
एमओयू पर गेल के कार्यकारी निदेशक (बिजनेस डेवलपमेंट एवं स्टार्ट-अप) संजय अग्रवाल और आरसीएफ की कार्यकारी निदेशक (प्रोजेक्ट, कॉरपोरेट एवं कोऑर्डिनेशन) ज्योति पाटिल ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर गेल के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक दीपक गुप्ता तथा आरसीएफ के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक एस. शिवकुमार मौजूद रहे। समारोह में दोनों कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
इस अवसर पर गेल के सीएमडी दीपक गुप्ता ने कहा कि प्रस्तावित उर्वरक परियोजना प्राकृतिक गैस के बेहतर उपयोग के माध्यम से दीर्घकालिक मूल्य सृजन और भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की कंपनी की रणनीति के अनुरूप है। उन्होंने कहा कि उर्वरक क्षेत्र में आरसीएफ की विशेषज्ञता और प्राकृतिक गैस मूल्य श्रृंखला में गेल की मजबूत उपस्थिति इस परियोजना को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि यह साझेदारी केंद्र सरकार की हाल ही में स्वीकृत राष्ट्रीय यूरिया निवेश नीति-2026 (NIPU-2026) और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य के अनुरूप है।
वहीं, आरसीएफ के सीएमडी एस. शिवकुमार ने कहा कि यह परियोजना देश में बढ़ती उर्वरक मांग को पूरा करने, आयात पर निर्भरता कम करने और महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में औद्योगिक विकास को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि आरसीएफ के उर्वरक संयंत्र संचालन, परियोजना विकास और विपणन के अनुभव के साथ गेल के गैस अवसंरचना और ऊर्जा क्षेत्र की विशेषज्ञता मिलकर विश्वस्तरीय उर्वरक संयंत्र स्थापित करने में सहायक होगी।
इस परियोजना से न केवल देश में यूरिया उत्पादन क्षमता बढ़ेगी, बल्कि प्राकृतिक गैस आधारित स्वच्छ और अधिक दक्ष उर्वरक उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, यह पहल भारत की उर्वरक आत्मनिर्भरता और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
