Coal India Limited faces overproduction concerns as coal output outpaces demand. Rising stock levels and slower offtake may impact pricing, logistics, and financial performance. Read full analysis.
भारत की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक कंपनी Coal India Limited (CIL) मांग में कमी के चलते ओवर प्रोडक्शन की स्थिति बन रही है। जहां एक ओर सरकार घरेलू कोयला उत्पादन बढ़ाने पर जोर दे रही है, वहीं मांग में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं होने से कंपनी का कोयले उत्पादन धीमा हो गया है।
रिकॉर्ड उत्पादन, लेकिन उठान धीमा
Coal India ने चालू वित्त वर्ष में उत्पादन लक्ष्य 887 मिलियन टन रखा था, लेकिन मांग में कमी और मौसम की वजह से उत्पादन 800 मिलियन टन के आसपास रह सकता है। कई राज्यों में बिजली की मांग अनुमान से कम रहने और कुछ पावर प्लांट्स के पास पर्याप्त स्टॉक होने के कारण कोयले का उठान (offtake) उत्पादन की तुलना में धीमा बताया जा रहा है। केंद्रीय कोयला मंत्री जी किशन रेड्डी ने फिक्की के एक कार्यक्रम में कहा कि देश में अधिकांश पावर प्लांट्स पर कोयला का स्टॉक पर्याप्त मात्रा में है। देश में कोयला उत्पादन काफी हो रहा है। सूत्रों के अनुसार, खदानों और पावर प्लांट्स दोनों जगह कोयले का स्टॉक बढ़ा है। यदि उत्पादन इसी गति से जारी रहता है और मांग समान अनुपात में नहीं बढ़ती, तो लॉजिस्टिक्स, भंडारण और कैश फ्लो पर दबाव बढ़ सकता है। दूसरी ओर विशेषज्ञों का मानना है कि गर्मियों में बिजली मांग में उछाल आता है, जिससे अतिरिक्त स्टॉक का उपयोग संभव हो सकता है। दूसरी ओर कंपनी अतिरिक्त कोयला स्टॉक का निर्यात करने पर भी विचार कर रही है।
सरकार की रणनीति
केंद्र सरकार का फोकस स्पष्ट है, ऊर्जा सुरक्षा और आयात में कमी। घरेलू उत्पादन बढ़ाकर विदेशी मुद्रा बचत और आत्मनिर्भरता पर जोर दिया जा रहा है। इसी रणनीति के तहत चालू वित्त वर्ष में एक बिलियन टन से ज्य़ादा कोयला उत्पादन लक्ष्य रखे गए हैं।
