एथेनॉल ब्लेंडिंग से भारत में पेट्रोल की कीमतें हैं स्थिर?

Petrol Prices India
Petrol Prices India

Global oil prices are rising due to the Iran-US conflict, pushing petrol prices higher across Pakistan, the US, Europe and Bangladesh. India has limited the increase to around 3% through tax cuts and ethanol blending.

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति प्रभावित होने से दुनिया के कई देशों में पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है। हालांकि, भारत ने समय रहते उठाए गए नीतिगत कदमों के कारण घरेलू ईंधन कीमतों को अपेक्षाकृत स्थिर बनाए रखा है।

भारत के पड़ोसी पाकिस्तान में हाल के दिनों में पेट्रोल की कीमतों में करीब 60 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके बाद वहां पेट्रोल की कीमत बढ़कर करीब 310 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर पहुंच गई है। दूसरी ओर अमेरिका में पेट्रोल की कीमतों में करीब 42 प्रतिशत, यूरोप में औसतन 20 प्रतिशत और बांग्लादेश में करीब 16 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इसके विपरीत भारत में पेट्रोल की कीमतों में केवल करीब 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

भारत में क्यों नियंत्रित रहीं पेट्रोल की कीमतें?

वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में सीमित वृद्धि देखने को मिली। इसकी प्रमुख वजह केंद्र सरकार द्वारा समय-समय पर एक्साइज ड्यूटी में कटौती, एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम को बढ़ावा देना तथा सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों द्वारा संतुलित मूल्य निर्धारण नीति अपनाना रहा।

केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा है कि सरकार उपभोक्ताओं पर महंगाई का बोझ कम रखने के लिए लगातार कदम उठा रही है। उन्होंने बताया कि एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम और ऊर्जा स्रोतों के विविधीकरण की वजह से भारत वैश्विक तेल संकट के प्रभाव को काफी हद तक नियंत्रित करने में सफल रहा है।

अमेरिका में भी बढ़ा ईंधन का दबाव

ईरान से जुड़े भू-राजनीतिक तनाव और तेल आपूर्ति को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के कारण अमेरिका में भी पेट्रोल की कीमतों में तेज उछाल आया है। हाल के सप्ताह में अमेरिकी गैसोलीन की औसत खुदरा कीमत बढ़कर 3.88 डॉलर प्रति गैलन पहुंच गई, जो पिछले कई सप्ताहों की सबसे बड़ी वृद्धि मानी जा रही है। रिफाइनरियों में उत्पादन संबंधी चुनौतियों और कम ईंधन भंडार ने भी कीमतों को ऊपर धकेला है।

जापान और यूरोप में भी महंगा हुआ ईंधन

जापान में कमजोर येन, बढ़ती आयात लागत और ऊर्जा महंगाई के कारण पेट्रोल की कीमतें लगातार ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। वहीं जर्मनी, फ्रांस, इटली और नीदरलैंड सहित कई यूरोपीय देशों में पहले से ही ऊंचे टैक्स और आयात लागत के कारण पेट्रोल दुनिया के सबसे महंगे ईंधनों में शामिल है। कई यूरोपीय देशों में पेट्रोल की खुदरा कीमत 1.8 से 2.2 यूरो प्रति लीटर (लगभग 180 से 220 रुपये प्रति लीटर) के बीच बनी हुई है।

भारत में पेट्रोल अभी भी अपेक्षाकृत सस्ता

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत करीब 102 रुपये प्रति लीटर के आसपास बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा रणनीति, विविध स्रोतों से कच्चे तेल की खरीद, एथेनॉल ब्लेंडिंग और कर राहत जैसे कदमों ने वैश्विक तेल संकट के बावजूद घरेलू बाजार को अपेक्षाकृत स्थिर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

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