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BIS has approved petrol with more than 20% ethanol blending, paving the way for E30 fuel in India. The move is expected to reduce crude oil imports, save foreign exchange, support farmers, and boost clean energy initiatives.

भारत की ऊर्जा सुरक्षा और पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने 20 प्रतिशत से अधिक एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद अब देश में 30 प्रतिशत तक एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E30) के उपयोग का रास्ता खुल गया है।

इस फैसले को भारत की वैकल्पिक ईंधन नीति के अगले चरण के रूप में देखा जा रहा है, जो देश की ऊर्जा रणनीति को नई दिशा दे सकता है।

एथेनॉल उत्पादन क्षमता में तेज बढ़ोतरी

भारत में वर्तमान समय में लगभग 15 अरब लीटर तक एथेनॉल उत्पादन क्षमता स्थापित हो चुकी है। सरकार के अनुसार एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम की वजह से देश को पेट्रोलियम आयात पर लगभग 90 हजार करोड़ रुपये तक की बचत हुई है। इस प्रक्रिया से किसानों को भी आर्थिक लाभ मिला है।

भारत सरकार पिछले कुछ वर्षों से पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण को लगातार बढ़ावा दे रही है। वर्तमान में देश में E20 ईंधन, जिसमें 20 प्रतिशत एथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल होता है, चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा चुका है।

E20 से आगे बढ़ेगा भारत

सरकार ने मूल रूप से 2025 तक E20 लागू करने का लक्ष्य तय किया था, लेकिन कई क्षेत्रों में इसे निर्धारित समय से पहले लागू कर दिया गया। अब BIS की मंजूरी के बाद E22, E25, E27 और E30 जैसे उच्च एथेनॉल मिश्रित ईंधनों के लिए रास्ता साफ हो गया है।

इस फैसले के बाद पेट्रोलियम कंपनियां अब अधिक एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधनों की बिक्री की दिशा में कदम बढ़ा सकती हैं।

कच्चे तेल के आयात में कमी की संभावना

ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार अधिक एथेनॉल मिश्रण से भारत की कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम हो सकती है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है, जिससे वैश्विक तेल कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव का सीधा असर अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।

एथेनॉल मिश्रण बढ़ने से:

  • विदेशी मुद्रा की बचत होगी
  • कार्बन उत्सर्जन कम हो सकता है
  • ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी
  • स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा मिलेगा

वाहन उद्योग के सामने चुनौतियां

हालांकि, अधिक एथेनॉल मिश्रित ईंधन के उपयोग के लिए वाहन उद्योग को कई तकनीकी बदलाव करने पड़ सकते हैं। ऑटोमोबाइल कंपनियों को ऐसे इंजन विकसित करने होंगे जो उच्च एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन के अनुरूप हों।

इसके अलावा, ईंधन वितरण नेटवर्क और संबंधित इंफ्रास्ट्रक्चर में भी सुधार की आवश्यकता पड़ सकती है।

किसानों को भी होगा फायदा

सरकार का मानना है कि एथेनॉल उत्पादन बढ़ने से किसानों को भी सीधा लाभ मिलेगा, क्योंकि गन्ना, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से एथेनॉल का उत्पादन किया जाता है।

इससे किसानों की आय बढ़ाने के साथ कृषि आधारित उद्योगों को मजबूती मिलने की संभावना है।

ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि BIS की यह मंजूरी भारत को पारंपरिक ईंधन से वैकल्पिक और स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में आगे ले जाने वाला महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

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