Rising crude oil prices do not always translate into higher profits for oil companies. Here’s how fuel price hikes affect Indian oil firms like IOC, BPCL, and HPCL.
अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने के बाद से तेल कंपनियों को घाटे की बात कही जा रही थी, लेकिन अब सरकार ने पेट्रोल डीजल की कीमतों में लगभग 4 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी कर दी है। ऐसे में भारत की सरकारी तेल विपणन कंपनियां — इंडियन ऑयल (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) के घाटे में करीब 25 फीसदी तक की कमी हुई है।
पेट्रोलियम मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद कंपनियों को कुछ राहत जरूर मिली है। विश्लेषकों के मुताबिक ईंधन के दाम में प्रत्येक 50 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी से कंपनियों के ऑपरेटिंग मुनाफे (EBITDA) में उल्लेखनीय सुधार आता है। अनुमान है कि ₹3.90 प्रति लीटर की हालिया बढ़ोतरी से कंपनियों के मार्जिन में मजबूत सुधार हो सकता है।
हालांकि, इससे पहले स्थिति उलट थी। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार तेल कंपनियां लंबे समय तक प्रतिदिन लगभग ₹1000 करोड़ तक का नुकसान झेल रही थीं क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल महंगा था जबकि घरेलू कीमतों में उसी अनुपात में वृद्धि नहीं हुई थी।
दूसरी ओर, कुछ कंपनियों के वित्तीय नतीजों में तेजी भी देखने को मिली है। इंडियन ऑयल का शुद्ध लाभ वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग 2.8 गुना बढ़कर ₹36,802 करोड़ पहुंच गया। इसमें इन्वेंटरी गेन और अन्य कारोबारी कारकों की भूमिका रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि तेल की कीमत बढ़ने का मतलब हमेशा तेल कंपनियों को सीधा फायदा नहीं होता। यदि कंपनियां बढ़ी हुई लागत ग्राहकों तक पहुंचा पाती हैं तो उनका मार्जिन सुधरता है, लेकिन कीमतों को नियंत्रित रखने की स्थिति में महंगा कच्चा तेल उनके लिए बोझ बन सकता है।
