proposed Ratnagiri refinery project
proposed Ratnagiri refinery project

Uncertainty looms over the Ratnagiri Refinery and Petrochemicals Ltd. (RRPCL) project, one of the world’s largest proposed refinery ventures, as delays, local opposition, and strategic concerns raise fresh questions about its future.

Latest updates on Ratnagiri Refinery project: दुनिया की सबसे बड़ी रिफायनरी प्रोजेक्ट्स में से एक रत्नागिरी रिफायनरी और पेट्रोकेमिकल्स प्रोजेक्ट (Ratnagiri Refinery and Petrochemicals Ltd.  RRPCL) पर संश्य के बादल गहरा रहे हैं। इस प्रोजेक्ट से कई निवेशकों ने अपने हाथ खींच लिए हैं। लंबे समय से लटकी हुई रिफायनरी से Abu Dhabi National Oil Company (ADNOC)  ने अपना निवेश वापस ले लिया है। यह प्रोजेक्ट महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले में स्थापित होने वाला था और इसका लक्ष्य देश की रिफाइनिंग क्षमता को नई ऊँचाइयों तक ले जाना था। लेकिन लंबे समय से चल रहे भूमि अधिग्रहण विवाद, स्थानीय विरोध, प्रशासनिक परेशानियों ने निवेशकों को परेशान कर दिया है और इस अनिश्चितता के कारण कई बड़ी कंपनियों ने या तो अपना निवेश वापस ले लिया है या फिर अपनी भागीदारी पर दुबारा विचार कर रहे हैं।

अबू धाबी की प्रमुख तेल कंपनी Abu Dhabi National Oil Company (ADNOC) ने रत्नागिरी रिफायनरी प्रोजेक्ट से अपना निवेश पहलें ही वापस ले लिया है। यह कंपनी पहले इस प्रोजेक्ट में Saudi Aramco के साथ साझेदारी में 25% हिस्सेदारी ले रही थी, लेकिन महाराष्ट्र में लंबे समय तक चल रही देरी और भूमि विवाद के चलते उसने निवेश से हटने का निर्णय लिया है। इसका मतलब यह है कि ADNOC अब इस रिफाइनरी परियोजना में भागीदार नहीं है और यह भारत की ऊर्जा परियोजना के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय निवेश की कमी परियोजना की गति को और धीमा कर सकती है।

इसी तरह दुनिया की सबसे बड़ी तेल उत्पादक Saudi Aramco भी पूरी तरह प्रोजेक्ट छोड़ने की बजाय अपने निवेश और प्रोजेक्ट की शर्तों को फिर से देखने की घोषणा की है। पहले Saudi Aramco, ADNOC के साथ मिलकर रत्नागिरी रिफायनरी में साझेदारी कर रही थी और अनुमान था कि इसका हिस्सा लगभग 25% होगा। लेकिन पिछले दशक भर में जमीन अधिग्रहण और प्रशासनिक समस्याओं के कारण Aramco ने कहा है कि वह प्रोजेक्ट शर्तों में संशोधन चाहता है या दूसरे अधिक लाभदायक, कम जोखिम वाले विकल्पों पर विचार कर रहा है, खासतौर पर कोस्टल रिफाइनरी प्रोजेक्ट्स जिसमें तेल लॉजिस्टिक्स सरल है।  यानी अभी Saudi Aramco पूरी तरह बाहर नहीं हुआ है, लेकिन उसने रत्नागिरी निवेश को क्लियर-कट छोड़ने के बजाय समीक्षा-मोड में रखा है, जो कि निवेश-विश्वास के लिए चिंता का कारण है।

क्या है सबसे बड़ी परेशानी

दरअसल इस रिफायनरी के लिए भूमि अधिग्रहण का काम ही अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। भूमि अधिग्रहण में देरी और स्थानीय विरोध, जिसकी वजह से रिफाइनरी साइट तैयार नहीं हो पाई है। इसके अलावा रत्नागिरी जैसे स्थान पर लॉजिस्टिक की परेशानियों के कारण यहां सामान पहुंचाना मुश्किल हो रही है। इस वजह से बड़ी पेट्रोलियम कंपनियां अन्य योजनाओं की ओर निवेश शिफ्ट कर रही हैं, Saudi Aramco ने संकेत दिया है कि वो आंध्र प्रदेश के रामयपत्नम पोर्ट के पास प्रस्तावित रिफाइनरी-पेट्रोकेमिकल प्रोजेक्ट में निवेश के लिए अब ज्य़ादा इच्छुक है। इन कारणों से कई विदेशी कंपनियां निवेश को स्थगित या समाप्त कर रही हैं, जिससे रत्नागिरी प्रोजेक्ट की भविष्य-योजना पर प्रश्न चिन्ह बन गया है।

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