देश की सबसे बड़ी तेल कंपनी ONGC ने तेल और गैस की खोज में बड़े निवेश की घोषणा की है। कंपनी को आंध्र प्रदेश में 8,110 करोड़ के मेगा ऑयल-गैस प्रोजेक्ट पर ग्रीन सिग्नल मिल गया है।
172 वेल्स से नई ऊर्जा क्रांति
ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (ओएनजीसी) आंध्र प्रदेश के आठ प्रोडक्शन माइनिंग लाइसेंस (PML) ब्लॉक्स में 172 वेल्स से तेल एवं गैस का ऑनशोर डेवलपमेंट और प्रोडक्शन शुरू करने जा रही है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) की एक्सपर्ट अप्रेजल कमिटी (EAC) ने पिछले महीने हुई बैठक में इस 8,110 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट को पर्यावरणीय मंजूरी (EC) की सिफारिश की है। यह कंपनी के प्रमुख ऑनशोर एक्सप्लोरेशन प्रोजेक्ट्स में से एक होगा।
प्रोजेक्ट डिटेल्स
प्रोजेक्ट की कुल लागत 8,110 करोड़ रुपये होगी, जिसमें पर्यावरण मैनेजमेंट प्लान (EMP) के लिए कैपिटल कॉस्ट 172 करोड़ रुपये और सालाना रिकरिंग कॉस्ट 91.16 करोड़ रुपये रखी गई है। इसके अलावा, पब्लिक हियरिंग में किए गए वादों को पूरा करने के लिए 11 करोड़ रुपये आवंटित किए जाएंगे। EAC ने साफ निर्देश दिए हैं कि EIA/EMP में बताए गए सभी पर्यावरणीय मैनेजमेंट, रिस्क मिटिगेशन और सेफगार्ड्स का सख्ती से पालन हो। प्रोजेक्ट आंध्र प्रदेश के कोनसीमा, वेस्ट गोदावरी और कृष्णा जिलों में फैले आठ PML ब्लॉक्स को कवर करेगा।
पर्यावरणीय शर्तें
EAC ने संवेदनशील इलाकों की रक्षा के लिए सख्त शर्तें लगाई हैं। कोरिंगा वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी के इको-सेंसिटिव एरिया से 10 किलोमीटर के दायरे में कोई वेल नहीं ड्रिल की जाएगी, जैसा कि मई में जारी NOC में कहा गया है। साथ ही, कोई भी पाइपलाइन या उसका हिस्सा फॉरेस्ट लैंड या प्रोटेक्टेड एरिया में बिना पूर्व अनुमति के नहीं बिछाई जा सकेगी। ये प्रतिबंध वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन सुनिश्चित करेंगे।
आर्थिक और रणनीतिक महत्व
यह प्रोजेक्ट आंध्र प्रदेश में ऑनशोर हाइड्रोकार्बन उत्पादन को काफी बढ़ावा देगा, जो भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए अहम है। ओएनजीसी के इस कदम से स्थानीय रोजगार सृजन होगा और KG बेसिन के आसपास के क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी। कंपनी पहले ही KG बेसिन में अन्य प्रोजेक्ट्स पर निवेश कर रही है, जैसे कि 4,600 करोड़ का एक और डेवलपमेंट प्लान, लेकिन यह 172 वेल्स वाला प्रोजेक्ट सबसे बड़ा ऑनशोर प्रयास है। पर्यावरणीय अनुपालन के साथ प्रोजेक्ट की शुरुआत से 2026 में उत्पादन में उछाल की उम्मीद है
