भारत में आने वाले सालों में तेज़ी से न्यूक्लियर पावर प्लांट लागने की योजना पर अब तेज़ी से काम होने लगा है। सार्वजनिक क्षेत्र की पावर कंपनी एनटीपीसी ने न्यूक्लियर पावर के लिए रूस की सरकारी कंपनी रोसатом और फ्रांस की कंपनी ईडीएफ (Électricité de France) के साथ गोपनीयता (Non-Disclosure) एग्रीमेंट साइन किए हैं। इन समझौतों का मकसद भारत में बड़े प्रेशराइज्ड वाटर रिएक्टर (PWR) और स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) टेक्नोलॉजी पर मिलकर काम करने की संभावनाएं तलाशना है। साथ ही कंपनी अमेरिकी फर्म वेस्टिंगहाउस के साथ भी बातचीत में है, हालांकि उसके साथ अभी बातचीत MoU और टेक्नोलॉजी एक्सप्लोरेशन स्तर पर है, औपचारिक एग्रीमेंट की दिशा में प्रगति जारी है।
कौन‑कौन सी विदेशी कंपनियां
रूस की Rosatom: एनटीपीसी ने रोसатом के साथ बड़े न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट्स पर सहयोग तलाशने के लिए नॉन‑डिस्क्लोजर एग्रीमेंट किया है, जिसमें बड़े PWR रिएक्टर और भविष्य में SMR टेक्नोलॉजी की संभावनाएं भी शामिल हैं।फ्रांस की EDF: फ्रांसीसी पावर दिग्गज ईडीएफ के साथ भी एनडीए साइन हुआ है ताकि भारत में बड़े न्यूक्लियर प्लांट और संभावित SMR प्रोजेक्ट्स के लिए टेक्नोलॉजी और प्रोजेक्ट डेवलपमेंट मॉडल पर काम किया जा सके।
अमेरिका की Westinghouse: एनटीपीसी अमेरिकी कंपनी वेस्टिंगहाउस के साथ स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स लगाने के लिए चर्चाओं में है, जिन्हें छोटे, फैक्ट्री‑बिल्ट रिएक्टर के रूप में उन साइटों पर लगाया जाएगा जहां बड़े न्यूक्लियर प्लांट संभव नहीं हैं।
एग्रीमेंट का फोकस क्या है
एनटीपीसी का लक्ष्य अगले 10 साल में करीब 10 गीगावाट और लंबी अवधि में 30 गीगावाट तक न्यूक्लियर कैपेसिटी खड़ी करने का है, जिसके लिए उसे ग्लोबल टेक्नोलॉजी पार्टनर की जरूरत है। रोसатом और ईडीएफ के साथ हुए समझौते प्रोजेक्ट के पूरे लाइफ‑सायकल—डिजाइन, इंजीनियरिंग, ईंधन सप्लाई, ऑपरेशन और मेंटेनेंस—पर सहयोग की जमीन तैयार करते हैं, हालांकि फिलहाल ये शुरुआती चरण के गोपनीय समझौते हैं।
घरेलू फ्रंट पर जेवी
न्यूक्लियर पावर को तेज़ी से बढ़ाने के लिए एनटीपीसी ने न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) के साथ ‘अनुषक्ति विद्युत निगम लिमिटेड (ASHVINI)’ नाम की जॉइंट वेंचर कंपनी में 49 फीसदी हिस्सेदारी ली है। यह जेवी महि‑बांसवाड़ा राजस्थान एटॉमिक पावर प्रोजेक्ट जैसे 700 मेगावाट के PHWR यूनिट्स को डेवलप करेगी और आगे चलकर अन्य न्यूक्लियर प्रोजेक्ट्स भी हैंडल करेगी, जिनमें विदेशी टेक्नोलॉजी पार्टनर्स की भूमिका महत्वपूर्ण रह सकती है।
पॉलिसी और मार्केट इंपैक्ट
हाल के कानूनी बदलावों से प्राइवेट और पीएसयू कंपनियों के लिए न्यूक्लियर सेक्टर में फाइनेंसिंग और सप्लायर लाइबिलिटी से जुड़ी बाधाएं कुछ हद तक कम हुई हैं, जिससे रोसатом, ईडीएफ और वेस्टिंगहाउस जैसे खिलाड़ी ज़्यादा सहजता से भारत में टेक्नोलॉजी देने को तैयार हो रहे हैं। एनटीपीसी का न्यूक्लियर की तरफ झुकाव कोयला‑आधारित बिजली पर निर्भरता घटाने, 2030 तक नॉन‑फॉसिल कैपेसिटी बढ़ाने और 2070 तक नेट‑ज़ीरो लक्ष्य में योगदान की इसकी लंबी रणनीति का हिस्सा है, जिसके लिए विदेशी कंपनियों के साथ ये एग्रीमेंट अहम माइलस्टोन माने जा रहे हैं।
