The Indian government is considering a price cap on ONGC’s new well gas after a 58% surge to $12.91/mmbtu, raising concerns among city gas distributors and impacting CNG and PNG prices.
सरकार देश की प्रमुख ऊर्जा कंपनी Oil and Natural Gas Corporation (ONGC) के ‘न्यू वेल गैस’ की कीमतों पर कैप लगाने पर विचार कर रही है। यह कदम तब सामने आया है जब इस गैस की कीमत में हाल ही में करीब 58% की तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे यह बढ़कर 12.91 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू (mmbtu) तक पहुंच गई है। यह कीमतें गहरे समुद्र (डीपवॉटर) गैस के लिए निर्धारित 8.9 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू से भी काफी ज्यादा है।
सूत्रों के अनुसार, ओएनजीसी की गैस की बढ़ती कीमत की वजह से गैस वितरण (City Gas Distribution – CGD) कंपनियों के बीच चिंता पैदा कर दी है। इन कंपनियों ने सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है, क्योंकि महंगी गैस के चलते सीएनजी (CNG) और पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) की कीमतों पर सीधा असर पड़ सकता है। इससे आम उपभोक्ताओं के लिए ईंधन महंगा होने की आशंका बढ़ जाती है।
पेट्रोलियम मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि अगर ‘न्यू वेल गैस’ की कीमतों पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो यह पूरे गैस मार्केट में परेशानी पैदा कर सकता है। ख़ासकर शहरी क्षेत्रों में सीएनजी का इस्तेमाल अब बड़े पैमाने पर ईंधन और परिवहन दोनों के लिए हो रहा है, ऐसे में गैस कीमतें बढ़ने से महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है। इसी कारण सरकार इस गैस की कीमत को एक निश्चित सीमा में बांधने (कैप लगाने) का विकल्प तलाश रही है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर घरेलू कीमतों पर पड़ना स्वाभाविक है, लेकिन अत्यधिक वृद्धि से मांग पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। इससे गैस आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने की सरकार की नीति भी प्रभावित हो सकती है।
वहीं, ONGC जैसे उत्पादकों का मानना है कि नई गैस परियोजनाओं में निवेश और उत्पादन लागत काफी अधिक होती है। ऐसे में उन्हें बेहतर कीमत मिलना जरूरी है, ताकि भविष्य में उत्पादन बढ़ाया जा सके। यदि कीमतों पर कैप लगा दिया जाता है, तो इससे निवेश प्रभावित हो सकता है और उत्पादन में गिरावट का जोखिम भी बढ़ सकता है।
सरकार अब संतुलन बनाने की कोशिश में है—एक तरफ उपभोक्ताओं को राहत देना और दूसरी ओर गैस उत्पादकों के हितों की रक्षा करना। आने वाले समय में इस मुद्दे पर अंतिम फैसला लिया जा सकता है, जो देश के ऊर्जा क्षेत्र और गैस बाजार दोनों के लिए महत्वपूर्ण होगा।
