Oil Companies Suffer ₹6 Per Litre Loss on Diesel Sales in Q4
Oil Companies Suffer ₹6 Per Litre Loss on Diesel Sales in Q4

Indian Oil, BPCL and HPCL reported losses of around ₹6 per litre on diesel sales in Q4, reversing last year’s profit, amid global crude volatility and controlled fuel prices.

देश की प्रमुख सरकारी तेल विपणन कंपनियों—Indian Oil Corporation (IOC), Bharat Petroleum Corporation Limited (BPCL) और Hindustan Petroleum Corporation Limited (HPCL)—को चालू वित्त वर्ष की चौथी तिमाही (31 मार्च तक) में डीजल की खुदरा बिक्री पर भारी नुकसान उठाना पड़ा है। ब्रोकरेज अनुमानों के अनुसार, इन कंपनियों को औसतन प्रति लीटर डीजल पर करीब ₹6 का घाटा हुआ, जबकि पिछले साल इसी अवधि में उन्हें लगभग ₹5.50 प्रति लीटर का मुनाफा हुआ था।

यह स्थिति वैश्विक कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में उतार-चढ़ाव और घरेलू स्तर पर ईंधन कीमतों को स्थिर बनाए रखने के सरकारी दबाव के कारण पैदा हुई है। तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार से ऊंचे दाम पर कच्चा तेल खरीद रही हैं, लेकिन खुदरा कीमतों में उसी अनुपात में वृद्धि नहीं कर पा रही हैं, जिससे उनका मार्जिन प्रभावित हो रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लंबे समय तक स्थिर रखने की नीति का असर कंपनियों की बैलेंस शीट पर साफ दिखने लगा है। डीजल, जो देश के परिवहन और औद्योगिक गतिविधियों का प्रमुख ईंधन है, उसकी मांग लगातार बनी हुई है, लेकिन कंपनियों को लागत और बिक्री मूल्य के बीच अंतर के कारण नुकसान उठाना पड़ रहा है।

इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय बाजार में रिफाइनिंग मार्जिन (GRM) में गिरावट और रुपये में कमजोरी भी कंपनियों के लिए अतिरिक्त चुनौती बनकर उभरी है। इन कारकों ने मिलकर सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों की वित्तीय स्थिति पर दबाव बढ़ाया है।

हालांकि, उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले समय में यदि अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आती है या सरकार ईंधन कीमतों को बाजार के अनुरूप समायोजित करने की अनुमति देती है, तो इन कंपनियों को राहत मिल सकती है। इसके अलावा, कंपनियां अपने अन्य बिजनेस सेगमेंट जैसे पेट्रोकेमिकल्स और गैस में विस्तार के जरिए नुकसान की भरपाई करने की कोशिश कर रही हैं।

कुल मिलाकर, चौथी तिमाही के ये आंकड़े यह संकेत देते हैं कि तेल विपणन कंपनियों के लिए मौजूदा बाजार परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण बनी हुई हैं और आने वाले समय में उनकी लाभप्रदता काफी हद तक नीतिगत फैसलों और वैश्विक बाजार के रुझानों पर निर्भर करेगी।

By Aman

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