India signals a strategic hydro policy shift by planning new hydropower projects on the Chenab River, a key water source for Pakistan’s Punjab and Sindh provinces, amid rising tensions over cross-border terrorism.
India’s Hydro Offensive: पाकिस्तान को उसके आतंकवाद का जवाब देने की तैयारी अब भारत ने हाइड्रो नीति से तैयार कर ली है। पाकिस्तान के पंजाब और सिंध प्रांत में पानी की प्रमुख स्रोत वाली चेनाब नदी पर अब भारत कई नए हाइड्रो प्लांट बनाने जा रहा है। देश की अग्रणी सार्वजनिक क्षेत्र की जलविद्युत कंपनी NHPC Limited ने जम्मू-कश्मीर में चेनाब नदी पर लगभग ₹5,700 करोड़ की लागत से नई जलविद्युत परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है। इस फैसले से जहां पाकिस्तान पर एक तरह का पानी अटैक होगा, वहीं केंद्र शासित प्रदेश में स्वच्छ ऊर्जा क्षमता बढ़ाने, स्थानीय रोजगार को प्रोत्साहन देने और क्षेत्रीय विकास को गति देने की दिशा में भी मदद मिलेगी।
यह भी पढ़ें: ग्रीन एनर्जी पर फोकस करेगी Indian Oil
एनएचपीसी के अनुसार, इन परियोजनाओं के जरिए जम्मू-कश्मीर की नदियों, विशेषकर चिनाब और उसकी सहायक नदियों की जल क्षमता का बेहतर उपयोग किया जाएगा। प्रस्तावित परियोजनाओं से सैकड़ों मेगावाट अतिरिक्त बिजली उत्पादन की उम्मीद है, जिससे न केवल जम्मू-कश्मीर बल्कि उत्तर भारत के अन्य राज्यों को भी स्वच्छ ऊर्जा आपूर्ति संभव होगी। दरअसल पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि के चेनाब नदी पर भारत बड़े बांध नहीं बना सकता है, इसके पानी का सिर्फ सीमित उपयोग ही भारत कर सकता है, लेकिन पाकिस्तान के भारत में लगातार आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देने के बाद भारत ने यह समझौता तोड़ने की घोषणा कर दी थी और भारत इस नदी पर भी बड़े हाइड्रो प्रोजेक्ट बनाने जा रहा है।
ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि यह निवेश भारत के नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों को हासिल करने में सहायक होगा। जलविद्युत को बेसलोड पावर के रूप में देखा जाता है, जो सौर और पवन ऊर्जा की अनिश्चितता को संतुलित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इन नई परियोजनाओं से कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी और हरित ऊर्जा मिश्रण को मजबूती मिलेगी।
स्थानीय रोजगार और इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा
परियोजनाओं के निर्माण चरण में हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है। साथ ही, सड़कों, पुलों और ट्रांसमिशन लाइनों जैसे बुनियादी ढांचे का विकास भी तेज होगा। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा और क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार होगा।
रणनीतिक और आर्थिक महत्व
जम्मू-कश्मीर भौगोलिक दृष्टि से जल संसाधनों से समृद्ध है। केंद्र सरकार लंबे समय से यहां जलविद्युत क्षमता के दोहन पर जोर देती रही है। NHPC का यह निवेश रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे सीमावर्ती क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलेगी और ऊर्जा सुरक्षा सुदृढ़ होगी।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि परियोजनाएं तय समयसीमा में पूरी हो जाती हैं, तो यह निवेश दीर्घकाल में राज्य के राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि करेगा। साथ ही, निजी और विदेशी निवेशकों का भरोसा भी बढ़ेगा।
कुल मिलाकर, ₹5,700 करोड़ की ये नई जलविद्युत परियोजनाएं जम्मू-कश्मीर को ऊर्जा हब बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती हैं।
