इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन ग्रीन एनर्जी, सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल, रिफाइनिंग क्षमता विस्तार और नए तेल आयात स्रोतों के जरिए ऊर्जा क्षेत्र में बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है।

नई दिल्ली: देश की सबसे बड़ी तेल विपणन कंपनी इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC) ऊर्जा क्षेत्र में बड़े बदलाव और विस्तार योजनाओं को लेकर लगातार सक्रिय नजर आ रही है। कंपनी न केवल अपनी रिफाइनिंग क्षमता बढ़ाने पर काम कर रही है, बल्कि ग्रीन एनर्जी, वैकल्पिक ईंधन और वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की नई खरीद रणनीति पर भी विशेष ध्यान दे रही है। विशेषज्ञों के अनुसार इंडियन ऑयल के ये कदम भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

रिफाइनिंग क्षमता और पेट्रोल पंप नेटवर्क का विस्तार

इंडियन ऑयल देश में पेट्रोलियम उत्पादों की बढ़ती मांग को देखते हुए अपनी रिफाइनिंग क्षमता में तेजी से वृद्धि कर रही है। कंपनी का लक्ष्य अगले कुछ वर्षों में अपनी कुल रिफाइनिंग क्षमता को लगभग 98 मिलियन टन प्रति वर्ष तक पहुंचाना है। इसके अलावा इंडियन ऑयल अपने रिटेल नेटवर्क का भी विस्तार कर रही है। कंपनी देशभर में पेट्रोल पंपों की संख्या बढ़ाकर 44 हजार से अधिक करने की योजना पर काम कर रही है। इससे उपभोक्ताओं को बेहतर सुविधा मिलने के साथ-साथ कंपनी की बाजार हिस्सेदारी भी मजबूत होगी।

ग्रीन एनर्जी और सस्टेनेबल फ्यूल पर जोर

ऊर्जा क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए इंडियन ऑयल स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं पर तेजी से काम कर रही है। हाल ही में कंपनी ने सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF) को बढ़ावा देने के लिए विमानन क्षेत्र में साझेदारी की है। SAF को पारंपरिक विमान ईंधन की तुलना में पर्यावरण के लिए ज्यादा सुरक्षित माना जाता है क्योंकि इससे कार्बन उत्सर्जन कम होता है।

इसके अलावा इंडियन ऑयल ग्रीन हाइड्रोजन, जैव ईंधन और अन्य स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों पर भी निवेश बढ़ा रही है। कंपनी का लक्ष्य भविष्य में पारंपरिक पेट्रोलियम ईंधन के साथ स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में भी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराना है।

कच्चे तेल आयात रणनीति में बदलाव

अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और व्यापारिक संतुलन को देखते हुए इंडियन ऑयल अपनी कच्चे तेल की खरीद रणनीति में बदलाव कर रही है। रिपोर्ट के अनुसार कंपनी ने रूस से कच्चे तेल का आयात कुछ हद तक कम किया है और ब्राजील, अंगोला तथा मध्य-पूर्व के देशों से खरीद बढ़ाई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह रणनीति भारत के ऊर्जा स्रोतों को विविध बनाने और वैश्विक व्यापार संबंधों को मजबूत करने में मदद करेगी।

ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

इंडियन ऑयल की विस्तार योजनाएं और स्वच्छ ऊर्जा पर बढ़ता निवेश भारत को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कंपनी देश में ईंधन आपूर्ति, निर्यात और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने में प्रमुख भूमिका निभा रही है। साथ ही, ग्रीन एनर्जी परियोजनाएं भारत के कार्बन उत्सर्जन कम करने के लक्ष्य को पूरा करने में भी मददगार साबित हो सकती हैं।

ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि इंडियन ऑयल की रणनीति भविष्य की ऊर्जा जरूरतों और पर्यावरणीय चुनौतियों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। आने वाले वर्षों में कंपनी पारंपरिक तेल क्षेत्र के साथ-साथ स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में भी भारत को वैश्विक स्तर पर मजबूत पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभा सकती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *