भारत में सिमलेस स्टील पाइप के आयात को लेकर घरेलू उद्योग की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। उद्योग संगठनों और निर्माताओं का कहना है कि सस्ते और अंडर-इनवॉइस्ड आयात, खासकर चीन और कुछ अन्य देशों से, भारतीय सिमलेस पाइप उद्योग को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं। संगठनों ने आगामी बजट में आयात पर कड़े नियंत्रण और शुल्क बढ़ाने की मांग की है।
सिमलेस पाइप का उपयोग तेल एवं गैस, पावर, रिफाइनरी, पेट्रोकेमिकल, इंफ्रास्ट्रक्चर, ऑटोमोबाइल और उभरते ईवी सेक्टर में व्यापक रूप से होता है। भारत में इस सेगमेंट में कई बड़े और मध्यम स्तर के निर्माता हैं, जिन्होंने पिछले कुछ वर्षों में भारी निवेश कर क्षमता विस्तार किया है। बावजूद इसके, सस्ते आयात के कारण घरेलू कंपनियों की क्षमता का पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा है।
उद्योग सूत्रों के अनुसार, वर्तमान में सिमलेस पाइप पर करीब 10 प्रतिशत सीमा शुल्क है, जिसे अपर्याप्त माना जा रहा है। घरेलू निर्माता इसे बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने की मांग कर रहे हैं, ताकि अनुचित प्रतिस्पर्धा पर अंकुश लगाया जा सके। उद्योग का आरोप है कि कुछ आयातक कम कीमत दिखाकर डंपिंग जैसे हालात पैदा कर रहे हैं, जिससे भारतीय बाजार में कीमतें गिर रही हैं और मार्जिन पर असर पड़ रहा है।
सीमलेस ट्यूब मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (STMAI) समेत कई संगठनों का कहना है कि भारत अब सिमलेस पाइप निर्माण में तकनीकी रूप से सक्षम हो चुका है और घरेलू मांग को पूरा करने के साथ-साथ निर्यात की भी बड़ी संभावनाएं हैं। लेकिन बढ़ते आयात के कारण निर्यात पर फोकस करने के लिए जरूरी वित्तीय मजबूती प्रभावित हो रही है।
उद्योग यह भी मांग कर रहा है कि सरकार प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) जैसी योजनाओं के जरिए निर्यात को प्रोत्साहित करे। निर्माताओं का प्रस्ताव है कि सिमलेस पाइप निर्यात पर 10 प्रतिशत तक का इंसेंटिव दिया जाए, जिससे भारतीय उत्पाद वैश्विक बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकें।
एक अन्य बड़ी चुनौती कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव है। सिमलेस पाइप निर्माण में इस्तेमाल होने वाले विशेष स्टील और अलॉय, जैसे निकल और मोलिब्डेनम, अंतरराष्ट्रीय बाजार से जुड़े होते हैं। ऐसे में सस्ते आयात और महंगे कच्चे माल का दोहरा दबाव घरेलू उद्योग की लाभप्रदता को प्रभावित कर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आयात पर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो इससे न केवल घरेलू निवेश प्रभावित होगा, बल्कि रोजगार और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य पर भी असर पड़ सकता है। वहीं, सरकार की ओर से इंफ्रास्ट्रक्चर, जल, ऊर्जा और तेल-गैस क्षेत्र में बढ़ते निवेश के चलते सिमलेस पाइप की मांग मजबूत बनी हुई है, जिसे घरेलू उद्योग पूरा करने में सक्षम है।
कुल मिलाकर, सिमलेस पाइप आयात का मुद्दा अब केवल व्यापार का नहीं, बल्कि घरेलू उद्योग की सुरक्षा, निवेश और दीर्घकालिक औद्योगिक विकास से जुड़ा सवाल बन गया है। उद्योग को उम्मीद है कि सरकार बजट और नीतिगत फैसलों के जरिए इस चुनौती का संतुलित समाधान निकालेगी।
