Energy Security: War Drives Surge in Coal Usage
Energy Security: War Drives Surge in Coal Usage

Coal India plans to e-auction 25.62 million tonnes of coal in April 2026 amid rising domestic demand and global energy disruptions, boosting India’s energy security.

#EnergySecurity: युद्ध से कोयले का बढ़ा इस्तेमाल खाड़ी देशों में चल रही लड़ाई के कारण कच्चे तेल और गैस की परेशानी को देखते हुए Coal India Limited (CIL) अप्रैल 2026 में 25.62 मिलियन टन कोयले की ई-नीलामी (e-auction) करने जा रही है। LNG, LPG और कच्चे तेल (crude oil) की सप्लाई में कमी के कारण भारत में कोयले की मांग तेजी से बढ़ रही है। लिहाजा भारत में कोयले के साथ साथ अन्य ऊर्जा के साधनों पर फोकस बढ़ गया है।
घरेलू मांग में उछाल, आयात हुआ महंगा
ऊर्जा बाजार में अस्थिरता के चलते LNG और LPG की कीमतों में ख़ासी बढ़ोतरी हो गई है। कच्चा तेल 110 डॉलर प्रति बैरल के आसपास चल रहा है। इसके बावजूद भी कच्चे तेल की सप्लाई में काफी परेशानी आ रही है। स्ट्रेट ऑफ हार्मूज से गैस और तेल की सप्लाई लाना मुश्किल और महंगा हो गया है। इसलिए भारत पर आयात का बोझ बढ़ गया है।
इन परिस्थितियों में भारत ने घरेलू कोयले का ज्य़ादा उपयोग करना शुरु कर दिया है। इसका सीधा फायदा Coal India को मिल रहा है, जो देश की लगभग 80% कोयला आपूर्ति करता है।
मार्च में युद्ध शुरु होने के बाद कोयला ऑफटेक (खपत/डिस्पैच) में 0.7% YoY वृद्धि दर्ज हुई है। यह बढ़ोतरी पिछले 6 महीनों में पहली बार देखने को मिली है। इससे पता चलता है कि पेट्रोल डीजल और एलपीजी की परेशानियों के बाद बहुत सारे स्थानों पर बिजली का उपयोग शुरु हो गया है और इसी वजह से बिजली का उत्पादन बी बढ़ रहा है। इंडस्ट्री की मांग में सुधार हो रहा है
ऊर्जा संकट के बीच कोयला फिर “बैकबोन फ्यूल” बन रहा है।
ई-नीलामी क्यों अहम?

Coal India की e-auction के जरिए खुले बाज़ार में कोयला बेचती है। इसी e-auction के जरिए कोयले की बाज़ार कीमत तय होती है। पावर प्लांट और इंडस्ट्री को ई-आक्शन से तुरंत कोयला मिल जाता है, साथ ही यह आयात के मुकाबले सस्ता विकल्प प्रदान करती है।
25.62 मिलियन टन की नीलामी से:
बाजार में सप्लाई बढ़ेगी
कीमतों को स्थिर रखने में मदद मिलेगी
Coal India की 25.62 मिलियन टन ई-नीलामी न सिर्फ बाजार को राहत देगी, बल्कि यह दिखाती है कि भारत वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच घरेलू संसाधनों पर भरोसा बढ़ा रहा है।

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