India’s renewable energy share in total installed power capacity has been steadily rising in recent years, with nearly 70–80% of new power additions coming from clean sources, while new coal-based power plants have significantly declined.
पिछले कुछ सालों में भारत में कुल बिजली क्षमता में Renewable Energy की हिस्सेदारी बढ़ती जा रही है। हालत यह है कि नई जोड़ी जा रही बिजली उत्पादन क्षमता में करीब 70 से 80 प्रतिशत तक बिजली Renewable Energy के जरिए जोड़ी जा रही है। जबकि परंपरागत कोयला आधारित बिजली के प्लांट्स का बनना अब काफी कम हो गया है।
देश में चालू वित्त वर्ष 2025-26 के पहले दस महीनों (अप्रैल 2025 से जनवरी 2026) के दौरान बिजली उत्पादन क्षमता में ऐतिहासिक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। Power Ministry के आंकड़ों के मुताबिक, इस अवधि में देश ने लगभग 52,537 मेगावाट (MW) नई बिजली उत्पादन क्षमता जोड़ी है। यह अब तक किसी भी वित्त वर्ष के पहले दस महीनों में दर्ज की गई सबसे बड़ी बढ़ोतरी है और इसमें 39,000 मेगावाट सिर्फ Renewable Energy में जोड़ी गई है। ऊर्जा क्षेत्र में यह उपलब्धि भारत की बढ़ती मांग, नीतिगत स्पष्टता और Renewable Energy पर तेज फोकस को दर्शाती है।
Ministry of Power के अनुसार, इस क्षमता वृद्धि में सबसे बड़ा योगदान नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) का रहा है। कुल नई जोड़ी गई क्षमता में लगभग 75 से 80 प्रतिशत हिस्सा सौर और पवन ऊर्जा परियोजनाओं से आया है। आंकड़ों के मुताबिक, करीब 39,000 मेगावाट से अधिक क्षमता केवल Renewable Energy से जोड़ी गई, जिसमें सौर ऊर्जा परियोजनाओं की हिस्सेदारी सबसे अधिक रही। सौर क्षेत्र में बड़े पैमाने पर ग्राउंड-माउंटेड प्लांट्स, रूफटॉप इंस्टॉलेशन और हाइब्रिड परियोजनाओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
पवन ऊर्जा क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति देखी गई है। विशेष रूप से गुजरात, तमिलनाडु और राजस्थान जैसे राज्यों में नई पवन परियोजनाएं शुरू की गईं, जिससे ग्रिड में clean energy की हिस्सेदारी बढ़ी है। इसके अतिरिक्त जलविद्युत और परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं से भी सीमित लेकिन स्थिर योगदान मिला है।
इस अवधि के अंत तक भारत की कुल स्थापित बिजली क्षमता 5,20,000 मेगावाट से अधिक हो चुकी है। दरअसल गैर-जीवाश्म ईंधन (Non-Fossil Fuel) आधारित क्षमता अब कुल इंस्टॉल्ड क्षमता का बड़ा हिस्सा बनती जा रही है। यह बदलाव भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं और ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस रिकॉर्ड क्षमता वृद्धि के पीछे कई कारक काम कर रहे हैं। पहला, सरकार द्वारा नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहन देने वाली नीतियां। दूसरा, निजी क्षेत्र की सक्रिय भागीदारी और प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया। तीसरा, ऊर्जा भंडारण (Energy Storage) और ट्रांसमिशन नेटवर्क के विस्तार पर दिया गया जोर।
Government of India ने 2030 तक 500 GW Renewable Energy आधारित क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है। मौजूदा प्रगति को देखते हुए यह target अब जल्द ही पूरा हो सकता है। भारत ने 2070 तक “नेट-ज़ीरो” (Zero Carbon / शुद्ध-शून्य कार्बन उत्सर्जन) देश बनने का लक्ष्य घोषित किया है। इस लक्ष्य को देश के प्रधानमंत्री Narendra Modi ने 26वीं संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (COP26) में ब्रिटेन के United Nations Framework Convention on Climate Change के ग्लासगो शिखर सम्मेलन में सार्वजनिक रूप से घोषित किया था।
हालांकि, Renewable Energy में तेज बढ़ोतरी के साथ कुछ चुनौतियां भी जुड़ी हैं। ग्रिड स्थिरता, Renewable Energy स्टोरेज की कमी, भूमि अधिग्रहण और ट्रांसमिशन लाइंस की जरूरत जैसे मुद्दों पर निरंतर काम करने की आवश्यकता है। विशेषकर सौर और पवन ऊर्जा की अनियमित प्रकृति को संतुलित करने के लिए बैटरी स्टोरेज और पंप्ड हाइड्रो जैसी तकनीकों का विस्तार जरूरी है।
ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि आने वाले महीनों में यदि यही रफ्तार बनी रहती है तो भारत वर्ष के अंत तक और भी बड़ा रिकॉर्ड बना सकता है। साथ ही, बढ़ती औद्योगिक गतिविधि, इलेक्ट्रिक वाहनों का विस्तार और शहरीकरण के कारण बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है, जिसे पूरा करने के लिए ऐसी क्षमता वृद्धि आवश्यक है।
कुल मिलाकर, वित्त वर्ष 2025-26 के पहले दस महीनों में 52,537 मेगावाट की नई क्षमता जोड़ना भारत के ऊर्जा इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह न केवल ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम है, बल्कि स्वच्छ और सतत विकास की प्रतिबद्धता को भी मजबूत करता है। यदि नीति, निवेश और तकनीकी नवाचार का यह संतुलन बना रहा, तो भारत वैश्विक ऊर्जा संक्रमण में अग्रणी देशों में शामिल हो सकता है।
