Vardhan Business Associates is constructing a 6 TPD CBG and a 40 TPD bio-fertilizer plant in Bettiah, Bihar
Vardhan Business Associates is constructing a 6 TPD CBG and a 40 TPD bio-fertilizer plant in Bettiah, Bihar

The Government of India has set a target to establish around 5,000 Compressed Bio-Gas (CBG) plants under the SATAT initiative to boost green energy production, reduce pollution, and enhance energy security.

नई दिल्ली। भारत में कंप्रेस्ड बायो गैस (CBG) सेक्टर तेजी से उभरता हुआ ग्रीन एनर्जी का प्रमुख स्तंभ है। जिसमें सरकार नई नीति लेकर आने जा रही है। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी SATAT (Sustainable Alternative Towards Affordable Transportation) योजना के तहत देशभर में CBG संयंत्र स्थापित किए जा रहे हैं, जिनका उद्देश्य कृषि अपशिष्ट, गोबर और जैविक कचरे से clean energy का उत्पादन करना है। देश में प्रदूषण को कम करने और कूड़े के ढेरों को कम करने में यह प्लांट्स महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

भारत सरकार ने CBG को स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन का अहम हिस्सा बनाया है। सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां जैसे Indian Oil Corporation, Bharat Petroleum Corporation Limited और Hindustan Petroleum Corporation Limited भी CBG एनर्जी का उत्पादन करने वाली कंपनियों के साथ समझौते कर गैस खरीद रही हैं, जिससे इस सेक्टर में निवेश को बढ़ावा मिल रहा है।

CBG क्या है और क्यों महत्वपूर्ण है?

CBG मूलतः बायोगैस का शुद्ध रूप है, जिसे प्राकृतिक गैस की गुणवत्ता तक अपग्रेड किया जाता है। इसका उपयोग वाहन ईंधन, औद्योगिक ऊर्जा और रसोई गैस के विकल्प के रूप में किया जा सकता है। CBG का कैलोरिफिक वैल्यू (यानि जलकर गर्मी देने की क्षमता) CNG के समान होता है, जिससे यह पेट्रोलियम आधारित ईंधनों का बेहतर विकल्प बनता है।

दरअसल भारत में हर साल करोड़ों टन पराली और अन्य कृषि या अन्य तरह के कूड़े जलाए जाते हैं, जिससे प्रदूषण बढ़ता है। CBG प्लांट इन को ऊर्जा में बदलकर न केवल प्रदूषण कम करते हैं, बल्कि किसानों को अतिरिक्त आय का स्रोत भी प्रदान करते हैं।

निवेश और उत्पादन लक्ष्य

सरकार ने 5000 CBG संयंत्र स्थापित करने का लक्ष्य रखा है। विभिन्न राज्यों में निजी और सार्वजनिक क्षेत्र के निवेश से 170 से ज्यादा प्लांट पहले ही चालू हो चुके हैं। पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे कृषि प्रधान राज्यों में इस क्षेत्र में विशेष तेजी देखी जा रही है।

नई CBG नीति जल्द आएगी
केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इंडिया एनर्जी वीक में कहा है कि पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय CBG (Compressed Bio-Gas) के लिए एक नई समर्पित नीति (dedicated CBG policy) जल्द जारी करेगा। यह नीति CBG वेल्यू चेन को मजबूत करेगी, जिसमें फीडस्टॉक उपलब्धता, वित्तीय सहायता और पाइपलाइन/इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास जैसे पहलुओं पर ध्यान दिया जाएगा। दरअसल CBG उत्पादन बढ़ने से देश के आयातित एलएनजी और क्रूड ऑयल पर निर्भरता घटेगी। इससे चालू खाता घाटा कम करने और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने में मदद मिलेगी।

फिलहाल देश में करीब 170 CBG प्लांट चल रहे हैं, जिनकी कुल क्षमता करीब 1200 टन प्रति दिन (TPD) है। जबकि इन प्लांट्स से उत्पादित गैस को बेचने के लिए 410 रिटेल आउटलेट्स भी हैं। इसके अलावा 300 CBG प्लांट निर्माणाधीन हैं, जो 2000 TPD क्षमता जोड़ेंगे, जबकि सरकार ने करीब 5000 सीबीजी प्लांट्स बनाने का लक्ष्य रखा हुआ है। ये आंकड़े दिखाते हैं कि CBG वेस्ट-to-energy, स्वच्छ ईंधन और ऊर्जा सुरक्षा में एक मजबूत भूमिका निभा रहा है।

पर्यावरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर असर

CBG प्लांट ना केवल एनर्जी का उत्पादन करता है, बल्कि इससे निकलने वाली बायो-स्लरी को जैविक खाद के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, जिससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटती है। इससे मिट्टी की गुणवत्ता सुधरती है और किसानों की लागत कम होती है। इसके अलावा, CBG सेक्टर ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन का बड़ा माध्यम बन रहा है। संयंत्र संचालन, फीडस्टॉक संग्रहण और परिवहन जैसे कार्यों में स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ रहा है।

हालांकि CBG सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन फीडस्टॉक की निरंतर उपलब्धता, वित्तीय सहायता और तकनीकी दक्षता जैसी चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि राज्यों और निजी क्षेत्र के बीच बेहतर समन्वय हो, तो भारत CBG उत्पादन में वैश्विक अग्रणी बन सकता है।

By Aman

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