Rising tensions between Iran, Israel, and the US in the Gulf region have pushed crude oil prices near $100 per barrel, leading to a sharp increase in polymer granules prices in India including PE, PP, and PET, impacting MSME plastic industries.
नई दिल्ली: खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और ईरान-इजराइल तथा अमेरिका के बीच टकराव का असर अब भारत के प्लास्टिक उद्योग पर साफ दिखाई देने लगा है। युद्ध के चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल, पेट्रोकेमिकल सप्लाई में बाधा और शिपिंग लागत बढ़ने से भारत में प्लास्टिक दानों (Polymer Granules) जैसे पॉलीएथिलीन (PE), पॉलीप्रोपाइलीन (PP) और PET की कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
उद्योग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, कच्चे माल की कीमतों में तेजी के कारण प्लास्टिक से जुड़े छोटे और मध्यम उद्योगों की लागत में करीब 60 प्रतिशत तक बढ़ोतरी देखी जा रही है, जिससे पैकेजिंग, बोतल निर्माण और उपभोक्ता वस्तुओं के उत्पादन पर दबाव बढ़ गया है।
कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से प्लास्टिक महंगा
प्लास्टिक का अधिकांश उत्पादन एथिलीन और प्रोपिलीन जैसे पेट्रोकेमिकल्स से होता है, जो कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस से प्राप्त होते हैं। इसलिए जैसे ही वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, प्लास्टिक के कच्चे माल की लागत भी तेजी से बढ़ जाती है।
खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष बढ़ने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई हैं। इसका सीधा असर पॉलीएथिलीन (PE), पॉलीप्रोपाइलीन (PP) और PET रेजिन की कीमतों पर पड़ा है, जो पैकेजिंग और प्लास्टिक उत्पादों के निर्माण में व्यापक रूप से उपयोग किए जाते हैं।
भारत में प्लास्टिक दानों के दाम बढ़ने लगे
मार्च 2026 की शुरुआत से भारत में कई प्रमुख पॉलिमर की कीमतों में 6 से 8 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है।
उद्योग से जुड़े व्यापारिक संगठनों के अनुसार, कुछ मामलों में PET प्लास्टिक की कीमतें केवल 12 दिनों के भीतर लगभग 40 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं।
इसी तरह पॉलीबैग और पैकेजिंग में उपयोग होने वाले प्लास्टिक की लागत भी कई क्षेत्रों में 80 प्रतिशत तक बढ़ने की खबर सामने आई है, जिससे पैकेजिंग उद्योग की लागत संरचना प्रभावित हो रही है।
सप्लाई चेन और शिपिंग पर असर
खाड़ी क्षेत्र में चल रहे संघर्ष का असर वैश्विक सप्लाई चेन पर भी पड़ा है।
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से तेल और पेट्रोकेमिकल सप्लाई प्रभावित हुई है।
फिलहाल केवल चुनिंदा देशों के जहाज ही इस मार्ग से गुजर पा रहे हैं।
वैश्विक पेट्रोलियम उत्पादों का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है।
समुद्री मालभाड़ा और बीमा लागत में तेजी आई है।
कई सप्लायर बढ़ती कीमतों के कारण स्टॉक रोक कर बैठ गए हैं।
इन परिस्थितियों के कारण भारत में प्लास्टिक कच्चे माल की उपलब्धता और कीमत दोनों प्रभावित हो रही हैं।
कई उद्योगों पर पड़ा असर
प्लास्टिक दानों की कीमतों में तेजी का असर कई उद्योगों पर दिखाई देने लगा है, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
पैकेजिंग उद्योग
बोतल और पेयजल उद्योग
ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग
FMCG पैकेजिंग सेक्टर
उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, बढ़ती कच्चे माल की कीमतों के कारण भारत के पैकेजिंग उद्योग की लागत में 15 से 20 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की जा रही है।
छोटे उद्योगों पर सबसे ज्यादा दबाव
भारत का लगभग 80 से 90 प्रतिशत प्लास्टिक उद्योग MSME सेक्टर के अंतर्गत आता है। ऐसे में कच्चे माल की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी से छोटे और मध्यम उद्योगों के मार्जिन पर भारी दबाव पड़ा है।
उद्योग संगठनों का कहना है कि यदि खाड़ी क्षेत्र में तनाव लंबा चलता है, तो आने वाले महीनों में प्लास्टिक उत्पादों की कीमतों में और वृद्धि हो सकती है, जिसका असर आम उपभोक्ताओं तक भी पहुंच सकता है।
