भारत और भूटान के बीच ऊर्जा साझेदारी ऐतिहासिक रूप से मजबूत बनी हुई है, जो अब हाइड्रो प्रोजेक्ट्स से आगे बढ़कर सौर, पवन, बायोमास, ग्रीन हाइड्रोजन और ऊर्जा स्टोरेज तक पहुंच रही हैं। हाल ही में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल के साथ भूटान के ऊर्जा और प्राकृतिक संसाधन मंत्री ल्योंपो जेम त्शेरिंग ने मुलाकात की थी। जिसमें एक MoU पर हस्ताक्षर किए गए और दोनों देशों की नेट-जीरो महत्वाकांक्षाओं पर बात की। जोकि क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेंगी।
प्रमुख जलविद्युत परियोजनाएं: 1020 MW का नया मील का पत्थर पुनात्सांगचू-II का उद्घाटन:
नवंबर 2025 में PM मोदी और भूटान राजा ने 1020 MW क्षमता वाली इस परियोजना का लोकार्पण किया था, जो भूटान की कुल जलविद्युत क्षमता में 40% की बढ़ोतरी करती है। पुनात्सांगचू-I में तेजी: 1200 MW वाली इस परियोजना में डैम 70% बन गया है और पावरहाउस भी पूरा हो गया है। उम्मीद है कि यह मार्च 2026 तक चालू हो जाएगा। यह भारत का पांचवां फंडेड बड़ा प्रोजेक्ट है, जोकि कुल 3000 MW बिजली उत्पादन करेगा।
भविष्य की योजनाएं: 2026 में खोरलोछू HEP जैसी नई परियोजनाएं शुरू होंगी, जो भारत-भूटान बिजली ट्रेड को दोगुना करेंगी।इस योजना के लिए भारत भूटान को 4000 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता देगा। भारत ने भूटान को ऊर्जा प्रोजेक्ट्स के लिए 4000 करोड़ रुपये की कम ब्याज वाली लाइन ऑफ क्रेडिट दी, जो नई HEP और रिन्यूएबल्स को गति देगी। इससे भूटान की 100% रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता बनी रहेगी और भारत को साफ बिजली निर्यात बढ़ेगा।
रिन्यूएबल्स में विस्तार: सौर, विंड, ग्रीन हाइड्रोजन, बायोमास और बैटरी स्टोरेज पर सहयोग; DGPC-CRPL के दिसंबर MoU से 100-250 MW हाइब्रिड (HEP+सौर) प्रोजेक्ट्स। PTC इंडिया डील: भूटान को 2000 MW बिजली इंपोर्ट की सुविधा, जो भारत की ऊर्जा मांग पूरी करेगी। तकनीकी ट्रांसफर: रोजगार सृजन, स्किल डेवलपमेंट और बॉर्डर स्थिरता बढ़ेगी। भारत-भूटान ग्रीन एनर्जी पार्टनरशिप से साउथ एशिया की क्लीन एनर्जी क्रांति!
