ONGC ट्रेनिंग सेंटर, गोवा। पिछले कुछ सालों में भारत एनर्जी के मामले में दुनिया में एक अलग स्थान वाला देश बन गया है। भारत अब सिर्फ पेट्रोलियम उत्पादों का खरीदार ही नहीं है, बल्कि यह दुनिया के चौथा सबसे बड़ा expoter भी हो गया है। दुनिया के सभी बड़े देश भारत के साथ energy सेक्टर में व्यापार करना चाहते हैं। ऐसे में चौथे India Energy Week 2026 में केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने engerynews के साथ विशेष बातचीत की।
सवाल- इंडिया एनर्जी वीक जैसे कार्यक्रम भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं?
हरदीप पुरी- देखिए, अंतरराष्ट्रीय स्थिति में भारत अब एनर्जी सेक्टर के ड्राइवर के तौर पर पहचाना जाता है। यहां इंडिया एनर्जी वीक के इस चौथे एडिशन में दुनिया की हर कंपनी आई है। सभी भारत के साथ काम करना चाहते हैं। यह दुनिया का प्रमुख एनर्जी इवेंट बन गया है। आज पेट्रोलियम उत्पादों के मामले में भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है। लेकिन हम इस क्षेत्र में दुनिया के पांचवे सबसे बड़े निर्यातक भी हैं। हम दुनिया के चौथे सबसे बड़ी रिफाइनिंग क्षमता वाले देश भी हैं। दुनिया में छोटी छोटी रिफाइनरी अब बंद होने के कगार पर हैं। आज हमारी रिफाइनिंग कैपेसिटी सालाना 260 मिलियन मैट्रिक टन है, जोकि अगले कुछ समय में 320 मिलियन मैट्रिक टन होने जा रही है। जोकि जल्द ही 400 से 450 मिलियन मैट्रिक टन होगी। ऐसे में भारत की स्थिति अब बहुत ही अलग है।
सवाल- आने वाले समय में भारत को एनर्जी के क्षेत्र में कैसे देखते हैं?
हरदीप पुरी- भारत की ऑयल मांग अगले दो दशकों तक दुनिया की कुल मांग का 25 प्रतिशत रहने वाला है, यानि जिस रफ्तार से दुनिया के देशों में तेल की मांग बढ़ेगी, उसमें सबसे बड़े हिस्सेदारों में हम होंगे। इसके साथ ही हमारी कोशिश है कि दुनिया की तेल की मांग का 35 प्रतिशत हम पूरा करें। इसलिए भारत की स्थिति अब बहुत ही बदल गई है।
सवाल- तेल-गैस की खोज़ को लेकर अंडमान का जिक्र लगातार हो रहा है, वहां से कब तक अच्छी ख़बर मिलेगी।
हरदीप पुरी- देखिए, गायाना में 46 कुंए खोदे थे, जिसमें उनका 1000 करोड़ रुपये खर्च किए थे और 47 कुएं की खुदाई में उन्हें तेल मिला। हमने अभी तक 3 से लेकर 4 कुएं ही खोदे हैं। हमारा इसमें समय जरुर लगेगा, लेकिन हमको तेल और गैस खोज़ के मिशन में कामयाबी जरुर मिलेगी। यह कोई कॉफी नहीं है, जहां हमने जाकर कॉफी बना ली, हमें इस खोज़ को लगातार जारी रखना होगा। हमने समुद्र मंथन योजना में यह फैसला लिया है कि हम दबाकर कुएं खोदेंगे।
पहले क्या होता था कि 2006 से लेकर 2014 तक कोई एक्सप्लोरेशन का काम ही नहीं हुआ और कीमतों को कम रखने के लिए 3.40 लाख करोड़ रुपये के ऑयल बांड लाए थे, जिसको इस सरकार ने भुगता है। लेकिन हमने कंज्यूमर के लिए लागतों को ही कम कर दिया है। पहले रसोई गैस को लेकर हमारा 39 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। लेकिन हमने इसको भी भुगता। प्रधानमंत्री जी ने उज्जवला योजना दी, इसमें आज भी पांच रुपये रोज़ाना की कीमत पर ईंधन मिल रहा है। जबकि दूसरे लोगों को 14 रुपये में मिल रहाहै।
