गोवा में आयोजित भारत ऊर्जा सप्ताह (IEW) 2026 में कुल मिलाकर 1.5 लाख करोड़ रुपये के समझौते हुए हैं, जिसमें भारत को गैस और तेल बचने के लिए कई देशों ने समझौते किए हैं। इस आयोजन के समापन पर केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री ने कहा कि दुनियाभर में जो उथल पुथल का सामना करने के लिए भारत पूरी तरह से तैयार है। 27 से 30 जनवरी तक चले इस चार दिवसीय वैश्विक सम्मेलन में भारत ने वैश्विक ऊर्जा मंच पर अपनी मजबूत स्थिति को और बेहतर किया है।
समापन सत्र के दौरान फायरसाइड चैट में पुरी ने भारत की ऊर्जा रणनीति पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “हमने लगातार आने वाली भू-राजनीतिक चुनौतियों का डटकर मुकाबला किया। हर संकट को अवसर में बदला—आपूर्ति स्रोतों का विविधीकरण और स्वच्छ ईंधनों की ओर तेज बदलाव करें। ” उन्होंने घरेलू तेल गैस खोज़, स्वच्छ ऊर्जा विस्तार और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता को ऊर्जा स्वायत्तता का आधार बताया। रूस-यूक्रेन युद्ध और मध्य पूर्व संकट जैसे झटकों में भी भारत ने आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत रखा।
गोवा के तटों पर आयोजित इस मेगा इवेंट में 50,000 से अधिक प्रतिभागी, 100 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधि, सीईओ और नीति निर्माता जुटे। हरित ऊर्जा, जैव ईंधन, नवीकरणीय स्रोत और ऊर्जा सुरक्षा पर चर्चा हुई। आयोजन से ₹1.5 लाख करोड़ के समझौते हुए, विशेषकर हरी हाइड्रोजन और बायोफ्यूल पर। अमेरिका, यूएई व सऊदी अरब के साथ साझेदारियां मजबूत हुईं।ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा
पुरी ने ओएनजीसी व ऑयल इंडिया के नए ब्लॉकों का जिक्र किया। 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य भारत को लीडर बनाएगा। स्थिर मूल्य नीति से उपभोक्ताओं को राहत मिली। गोवा सरकार, पेट्रोलियम मंत्रालय व वैश्विक भागीदारों के सहयोग से सफल आयोजन हुआ। मंत्री ने IEW 2027 का निमंत्रण दिया। आजादी का अमृत महोत्सव के अंतर्गत यह कार्यक्रम भारत की स्वतंत्रता यात्रा को ऊर्जा क्षेत्र से जोड़ता
