POWER MINISTER Manohar Lal ON A TWO-DAY VISIT TO JAMMU AND KASHMIR TO REVIEW HYDROELECTRIC PROJECTS
POWER MINISTER Manohar Lal ON A TWO-DAY VISIT TO JAMMU AND KASHMIR TO REVIEW HYDROELECTRIC PROJECTS

जम्मू-कश्मीर में बन रहे हाइड्रो पावर प्लांट्स के कामकाज में तेज़ी लाने के लिए केंद्रीय ऊर्जा तथा आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल आज जम्मू पहुंचे, जहां उन्होंने जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश में राष्ट्रीय जलविद्युत निगम (एनएचपीसी) की प्रमुख जलविद्युत परियोजनाओं की समीक्षा की। जम्मू कश्मीर में करीब 26 हाइड्रो प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है, इनमें से 6 प्रोजेक्ट्स तो बिजली का उत्पादन भी करने लगे हैं। अब यह राज्य बिजली के मामले में ना सिर्फ आत्मनिर्भर है, बल्कि यह दूसरे राज्यों को बिजली बेच भी रहा है। राज्य में कुल 15 हज़ार मेगावाट से ज्य़ादा हाइड्रो प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है।

जम्मू-कश्मीर में एनएचपीसी और जेकेएसपीडीसी के 6 प्रमुख हाइड्रो प्रोजेक्ट्स बिजली उत्पादन कर रहे हैं। इनमें सलाल, ऊरी-I, दुलहस्ती, सेवाँ-II, ऊरी-II और किशनगंगा शामिल हैं, जिनकी कुल उत्पादन क्षमता लगभग 2,250 मेगावाट है।

जबकि केंद्र और संयुक्त उद्यमों द्वारा 5 बड़े प्रोजेक्ट्स निर्माणाधीन हैं, जिनकी कुल क्षमता लगभग 3,090 मेगावाट है। इन प्रमुख परियोजनाओं में पाकल दुल, रतले, किरु, क्वार और परनाई शामिल हैं। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर में 15 प्रमुख हाइड्रो प्रोजेक्ट्स योजना या निर्माण के विभिन्न चरणों में हैं, जिनका कुल सम्मिलित लक्ष्य लगभग 7,768 मेगावाट का है। अगले कुछ सालों में जम्मू-कश्मीर एक एक बड़े ऊर्जा उत्पादन हब के तौर पर बदलने जा रहा है।

इन प्रोजेक्ट्स के बनने के बाद भारत झेलम, चेनाब, किशनगंगा, पुंछ और तवी नदियों के पानी का इस्तेमाल बिजली उत्पादन में कर पाएगा और पाकिस्तान को भी जाने वाले पानी पर भी बेहतर तरीके से कंट्रोल कर पाएगा। केंद्रीय ऊर्जा मंत्री ने इस दौरान राज्यों के अधिकारियों के साथ भी प्रोजेक्ट में तेज़ी लाने के लिए बातचीत की, उनके साथ विद्युत मंत्रालय के सचिव पंकज अग्रवाल और एनएचपीसी के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक (सीएमडी) भूप्रेंद गुप्ता भी थे। कंपनी सीएमडी ने मंत्री को जम्मू-कश्मीर में चल रही विभिन्न जलविद्युत परियोजनाओं में चल रहे कामकाज के बारे में ऊर्जा मंत्री को बताया।

दौरे के पहले दिन श्री मनोहर लाल ने रियासी जिले में स्थित एनएचपीसी की सलाल पावर परियोजना का निरीक्षण किया। यहां उन्हें परियोजना में चल रहे विभिन्न कार्यों, विशेष रूप से जलाशय में जमा गाद (सिल्ट) हटाने के कार्यों की विस्तृत जानकारी दी गई। मंत्री ने अधिकारियों को सलाल जलाशय में तलछट हटाने की प्रक्रिया में तेजी लाने के स्पष्ट निर्देश दिए, ताकि जल संसाधनों का अधिकतम और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।

यह उल्लेखनीय है कि चिनाब नदी पर स्थित सलाल पावर स्टेशन में वर्षों से जमा हो रही गाद के कारण जल भंडारण क्षमता और बिजली उत्पादन प्रभावित हो रहा था। हाल ही में सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty – IWT) की समाप्ति के बाद, सलाल परियोजना में बड़े पैमाने पर सिल्ट हटाने का कार्य शुरू किया गया है। इसका उद्देश्य जलाशय की क्षमता को पुनः बहाल करना और बिजली उत्पादन को उसकी पूर्ण क्षमता तक पहुंचाना है।

मंत्री ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में जलविद्युत परियोजनाएं न केवल क्षेत्र के आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं, बल्कि यह देश की हरित ऊर्जा नीति का भी अहम हिस्सा हैं। उन्होंने एनएचपीसी के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करना और मौजूदा परियोजनाओं की दक्षता बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता है।

एनएचपीसी के सीएमडी भूपेंद्र गुप्ता ने मंत्री को आश्वस्त किया कि सलाल सहित अन्य परियोजनाओं में सभी कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूरे किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि गाद हटाने के कार्य से परियोजना की उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय सुधार होगा और इससे क्षेत्र को स्थायी लाभ मिलेगा।

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