नई दिल्ली। देश में बिजली वितरण को स्मार्ट और बेहतर बनाने के लिए स्मार्ट मीटर लगाने का अभियान तेज हो गया है। बिजली के घाटे को कम करने के लिए अभी तक आरडीएसएस के तहत 20.33 करोड़ स्मार्ट मीटर स्वीकृत हो चुके हैं, जिनमें से 4.76 करोड़ मीटर अब तक लगाए जा चुके हैं।
यह जानकारी संसद में बिजली मंत्रालय ने दी। मंत्रालय के मुताबिक, यह बिजली खपत स्मार्ट निगरानी, वितरण दक्षता और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। आरडीएसएस योजना जुलाई 2021 में शुरू हुई, जिसमें 2027 तक 25 करोड़ प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाने का लक्ष्य है। विभिन्न योजनाओं के तहत कुल 3.46 करोड़ मीटर लग चुके हैं, जिसमें बिहार और असम अग्रणी हैं। बिहार में 79.58 लाख, महाराष्ट्र में 66.60 लाख तथा उत्तर प्रदेश में 57.20 लाख स्मार्ट मीटर स्थापित हैं। सरकार ने 23,000 करोड़ रुपये इस योजना के तहत दिए हैं। जिसमें ‘मेक इन इंडिया’ को प्राथमिकता दी गई। ईईएसएल ने उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा आदि में 42 लाख से अधिक मीटर लगाए हैं। इंटेलिस्मार्ट और अदानी जैसे निजी खिलाड़ी भी तेजी से योगदान दे रहे हैं।हालांकि, लक्ष्य से पीछे रहने के कारण चिंता बनी हुई है। फरवरी 2025 में मात्र 99 लाख (4.89%) मीटर लगे थे, जो मध्य-2025 तक 2.5 करोड़ पहुंचा। देरी के प्रमुख कारण नया कॉन्सेप्ट अपनाना, टेंडरिंग में विलंब, फील्ड इंस्टॉलेशन परीक्षण तथा कुछ राज्यों की सुस्ती हैं। 11 राज्य और 2 केंद्र शासित प्रदेशों में अभी एक भी मीटर नहीं लगा। सरकार ने एएमआईएसपी और डिस्कॉम के बीच बाधाओं को दूर करने तथा 31 मार्च 2026 तक पूर्णता का लक्ष्य रखा है। स्मार्ट मीटर से वाणिज्यिक घाटा कम होगा, राजस्व बढ़ेगा और बिलिंग-कलेक्शन दक्षता सुधरेगी।
